India vs Australia ODI & T20 Series 2025

IND VS AUS

The Rivalry returns! India vs Australia ODI & T20 schedule is locked. All eyes on October 2025. Your 2025 cricket plans just got sorted.  Forget everything else. This is the only schedule that matters: IND vs AUS 2025 is coming.

The battle for cricketing supremacy will shift to Australia’s shores in late 2025. This limited-overs tour promises fireworks, with 3 ODIs and 5 T20Is set to unfold at some of the world’s most iconic grounds. India’s next major assignment in the white-ball format is officially confirmed. Get ready for a high-stakes, action-packed series as the Men in Blue take on the defending champions in their own backyard across eight gripping matches.

IND vs AUS ODI schedule :

IND vs AUS
IND vs AUS ODI Schedule

From the pace and bounce of Perth to the history of the SCG and the electric atmosphere of the MCG, the India vs Australia 2025 series will take fans on a thrilling journey. Here is the full itinerary.  The Adelaide Oval, Manuka Oval, and The Gabba are all on the itinerary! Prepare for a massive cricketing feast as India tours Australia for a spectacular limited-overs series.

IND vs AUS T20 Schedule:

IND vs AUS T20
IND vs AUS T20 Schedule

 

 

 

 

 

The cricketing rivalry between India and Australia is historically intense, with their statistical records varying significantly across formats.

In ODIs, Australia holds a strong historical lead in head-to-head wins, often prevailing in high-stakes World Cup encounters. However, in T20Is, India has demonstrated a clear dominance with a superior win-loss ratio, showcasing their prowess in the shortest format.

Here is the stats :

ODI :- India and Australia have played 152 One Day Internationals (ODIs) against each other. Australia has won 84 matches and India has won 58 matches.10 matches ended with No Result.

T20 :- India and Australia have played a total of 32 T20 International (T20I) matches against each other. India has won 20 matches and Australia has won 11 matches.1 match ended with No Result.

 

 

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      India vs West Indies Test Series 2025

      The two-Test match Test series between India and West Indies is going to start from October 2, in which fans will get to see an exciting and competitive cricket.

      The history of cricket is rich with tales of the India-West Indies rivalry, a storied fixture that once represented the ultimate battle between India’s emerging defiance and the fearsome dominance of the Caribbean giants. While the head-to-head records speak of a more balanced past, the modern era is defined by a clear shift in power. As the two-match Test series commences, it serves as a fascinating intersection of contrasting legacies: the Indian team, a formidable force in their home fortress, facing a West Indies side determined to demonstrate progress in their Test resurgence.

      For the hosts, led by the new Test captain Shubman Gill, this series is a crucial assignment in the World Test Championship (WTC) cycle, offering vital points to solidify their position at the top of the table. Their challenge is to maintain the ruthless consistency and intensity that has defined their long-standing home supremacy, particularly on turning tracks that will favor their world-class spin attack. For Roston Chase’s West Indies, the odds are heavily stacked against them, but this tour represents an opportunity for the young squad to play without pressure, focusing on showing sustained character and resilience against spin—the true measure of their ongoing red-ball revival. Ultimately, while the contest may appear one-sided on paper, the series is a stage for both teams to either assert control over their destiny or defy overwhelming expectations.

      IND vs WI schedule

      IND vs WI Test Squad:

      India Test Squad:

      Shubman Gill (Captain) ,Yashasvi Jaiswal, KL Rahul, Sai Sudharsan, Devdutt Padikkal, Dhruv Jurel (WK), Ravindra Jadeja (Vice-Captain),
      Washington Sundar, Jasprit Bumrah, Axar Patel, Nitish Kumar Reddy, N Jagadeesan, Mohammed Siraj, Prasidh Krishna, Kuldeep Yadav

      West Indies Test Squad:

      Roston Chase (Captain), Jomel Warrican (Vice-Captain), Kevlon Anderson, Alick Athanaze, John Campbell, Tagenarine Chanderpaul,
      Justin Greaves, Shai Hope, Tevin Imlach, Alzarri Joseph, Brandon King, Anderson Phillip, Khary Pierre, Jayden Seales
      Johann Layne (Replacement for the injured Shamar Joseph)

       

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          देवी माँ के शक्तिपीठ

          नवरात्रि: व्रत और इसका महत्व

          ॥देवी माँ के शक्तिपीठ॥

          देवी  माँ के शक्तिपीठ वे पवित्र स्थान हैं जहाँ देवी सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे थे। इन स्थानों को बहुत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। प्रमुख रूप से 51 शक्तिपीठ माने जाते हैं, हालांकि कुछ मान्यताओं के अनुसार इनकी संख्या 52 या 108 भी है।

          51 शक्तिपीठों का महत्व

          इन शक्तिपीठों का निर्माण तब हुआ जब भगवान शिव ने देवी सती के शरीर को लेकर तांडव करना शुरू किया था। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए ताकि शिव का क्रोध शांत हो सके। ये टुकड़े जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। हर शक्तिपीठ में देवी के एक रूप की पूजा होती है और उनके साथ भैरव (शिव का एक रूप) भी पूजे जाते हैं।

          51 शक्तिपीठों की सूची और उनकी जानकारी

          • किरीट शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी सती का किरीट (मुकुट) गिरा था। देवी का नाम विमला है।
          • कात्यायनी शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: मथुरा के पास भूतेश्वर में, देवी का केश-गुच्छ (बालों का गुच्छा) गिरा था। देवी का नाम उमा है।
          • करवीर शक्तिपीठ, महाराष्ट्र: यहाँ देवी का त्रिनेत्र (तीसरा नेत्र) गिरा था। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
          • श्री पर्वत शक्तिपीठ, जम्मू और कश्मीर: यहाँ देवी का कंठ (गला) गिरा था। देवी का नाम श्रीमती है।
          • विशालाक्षी शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर देवी का कुंडल (कान का आभूषण) गिरा था। देवी का नाम विशालाक्षी है।
          • गंडकी शक्तिपीठ, नेपाल: यहाँ देवी का दक्षिण (दाहिना) गंड (गाल) गिरा था। देवी का नाम मुक्तिनाथी है।
          • बहुला शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी का बाहु (हाथ) गिरा था। देवी का नाम बहुला है।
          • मंगल चंडिका शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की अंगुलि (अंगुली) गिरी थी। देवी का नाम सर्वमंगला है।
          • उजांनी शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की कलाई गिरी थी। देवी का नाम भ्रामरी है।
          • त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ, त्रिपुरा: यहाँ देवी का दक्षिण पाद (दाहिना पैर) गिरा था। देवी का नाम त्रिपुरसुंदरी है।
          • चट्टल शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी का कपाल (खोपड़ी) गिरा था। देवी का नाम भवानी है।
          • चंद्रनाथ शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी की भुजा (कंधे) गिरी थी। देवी का नाम भवानी है।
          • सुगंधा शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी की नासिका (नाक) गिरी थी। देवी का नाम सुगंधा है।
          • हिंगलाज शक्तिपीठ, पाकिस्तान: यहाँ देवी का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था। देवी का नाम हिंगलाज है।
          • भैरवपर्वत शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी का ओष्ठ (ऊपरी होंठ) गिरा था। देवी का नाम अंबिका है।
          • अट्टहास शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी का अधर (नीचे का होंठ) गिरा था। देवी का नाम फुल्लरा है।
          • महालक्ष्मी शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी का ओष्ठ (ऊपरी होंठ) गिरा था। देवी का नाम कालिका है।
          • अंबिका शक्तिपीठ, राजस्थान: यहाँ देवी के दाँत गिरे थे। देवी का नाम अंबिका है।
          • कामाख्या शक्तिपीठ, असम: यहाँ देवी की योनि गिरी थी। देवी का नाम कामाख्या है।
          • जला देवी शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की जीभ गिरी थी। देवी का नाम ज्वालामुखी है।
          • माया देवी शक्तिपीठ, उत्तराखंड: यहाँ देवी का हृदय गिरा था। देवी का नाम माया है।
          • जुगाड़्या शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की कलाई गिरी थी। देवी का नाम योगदा है।
          • नैना देवी शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की नेत्र (आँखें) गिरी थीं। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
          • गुहेश्वरी शक्तिपीठ, नेपाल: यहाँ देवी के घुटने गिरे थे। देवी का नाम महाशिरा है।
          • कालीघाट शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी के अंगुष्ठ (दाहिने पैर का अंगूठा) गिरे थे। देवी का नाम कालिका है।
          • किरीट शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी के कान गिरे थे। देवी का नाम विमला है।
          • जसोरा शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी के अंगूठे (हाथ के) गिरे थे। देवी का नाम यशोदामती है।
          • महिषमर्दिनी शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की दाहिनी जांघ गिरी थी। देवी का नाम चंडी है।
          • जयंती शक्तिपीठ, मेघालय: यहाँ देवी की बाईं जंघा गिरी थी। देवी का नाम महाकाली है।
          • कामाख्या शक्तिपीठ, असम: यहाँ देवी की योनि गिरी थी। देवी का नाम कामाख्या है।
          • अमरनाथ शक्तिपीठ, जम्मू और कश्मीर: यहाँ देवी का कंठ (गला) गिरा था। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
          • भैरवपर्वत शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी के होंठ गिरे थे। देवी का नाम अंबिका है।
          • सोमनाथ शक्तिपीठ, गुजरात: यहाँ देवी का पेट गिरा था। देवी का नाम चामुंडा है।
          • त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ, त्रिपुरा: यहाँ देवी का दाहिना पैर गिरा था। देवी का नाम त्रिपुरसुंदरी है।
          • कंकाल शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की कंधे की हड्डी गिरी थी। देवी का नाम कंकालेश्वरी है।
          • नकुलेश्वरी शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी का बायाँ पैर गिरा था। देवी का नाम नकुलेश्वरी है।
          • लंका शक्तिपीठ, श्रीलंका: यहाँ देवी का घुटना गिरा था। देवी का नाम इंद्रक्षी है।
          • विरजा शक्तिपीठ, ओडिशा: यहाँ देवी की नाभि गिरी थी। देवी का नाम विमला है।
          • ज्वालामुखी शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की जीभ गिरी थी। देवी का नाम ज्वालामुखी है।
          • त्रिपुरभैरवी शक्तिपीठ, त्रिपुरा: यहाँ देवी का वस्त्र गिरा था। देवी का नाम त्रिपुरभैरवी है।
          • सुंदर शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की दाईं भुजा गिरी थी। देवी का नाम सुंदरी है।
          • अंबिका शक्तिपीठ, राजस्थान: यहाँ देवी की बाईं भुजा गिरी थी। देवी का नाम अंबिका है।
          • कोल्हापुर शक्तिपीठ, महाराष्ट्र: यहाँ देवी की आँखें गिरी थीं। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
          • देवीकूप शक्तिपीठ, हरियाणा: यहाँ देवी के एड़ी गिरी थी। देवी का नाम सावित्री है।
          • मनिकर्णिका शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: यहाँ देवी का कुंडल (कान का आभूषण) गिरा था। देवी का नाम विशालाक्षी है।
          • शारदा शक्तिपीठ, पाकिस्तान: यहाँ देवी की दाईं हथेली गिरी थी। देवी का नाम शारदा है।
          • अमरनाथ शक्तिपीठ, जम्मू और कश्मीर: यहाँ देवी का गर्दन गिरी थी। देवी का नाम महाकाली है।
          • प्रयाग शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: यहाँ देवी के अंगुलियों (हाथ के) गिरे थे। देवी का नाम ललिता है।
          • भैरवपर्वत शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी का ऊपरी होंठ गिरा था। देवी का नाम अंबिका है।
          • मणिकर्णिका शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: यहाँ देवी के दाँत गिरे थे। देवी का नाम विशालाक्षी है।
          • दक्षिणेश्वर काली मंदिर, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। देवी का नाम भवानी है।

           

          शक्तिपीठों की पूजा का फल

          इन शक्तिपीठों में दर्शन और पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। ऐसा माना जाता है कि इन स्थानों पर माँ दुर्गा की विशेष कृपा होती है और वे अपने भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं। इन मंदिरों में नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ रहती है।

           

          Properties and Characteristics of Thorium – An Analysis

          थोरियम के गुण और विशेषताएँ - एक विश्लेषण

          Thorium is a weakly radioactive chemical element. Its symbol is Th and atomic number is 90. It is a naturally occurring metal, named after Thor, the god of Scandinavian mythology.

          Properties and Characteristics of Thorium

          Radioactivity: Thorium is a slowly decaying radioactive element. Its most stable isotope is thorium-232 (Th232), which has a half-life of 14.05 billion years.

          Physical Properties: It is a soft, silvery-white metal that darkens when exposed to air. It melts at high temperatures.

          Thorium Cycle: It is an important nuclear fuel because it can absorb neutrons to transform into uranium-233 (U233), a fissile material that can be used to produce energy in nuclear reactors.

          Where is Thorium Found?

          India has the largest reserves of thorium. Subsequently, significant reserves are found in countries like Brazil, Australia, the United States, and Turkey.

          India holds the largest share of the world’s thorium reserves, accounting for approximately 25-30% of the total global reserves. Thorium in India is primarily found in the form of monazite sand.

          Coastal Regions: Most of India’s thorium reserves are located in the eastern and western coastal regions of the country.

          States: The largest reserves are located in the coastal areas of Kerala, Andhra Pradesh, and Tamil Nadu. Thorium reserves also exist in Odisha, Jharkhand, and Bihar.

          The use of thorium is an important component of India’s nuclear energy program, which aims to ensure energy security by utilizing the country’s vast thorium reserves.

          Other Major Thorium Reserves in the World

          Besides India, several other countries also have significant thorium reserves, as follows:

          Brazil:   Brazil also has large thorium reserves, found primarily in coastal sands.

          Australia: Australia also has abundant thorium deposits.

          The United States:  The United States, particularly in Idaho and Montana, has significant thorium reserves.

          Turkey: Turkey has also been confirmed to have significant thorium reserves.

          Egypt: Thorium deposits are also found in the Nile Delta region of Egypt.

          Uses of Thorium:

          Thorium is used in many fields, the most important of which is nuclear energy. It also has some traditional and industrial uses.

          Nuclear Energy: The most important and future use of thorium is in the production of nuclear energy.

          Nuclear Fuel: Thorium-232 (Th232) is a fertile material, meaning it cannot be used directly for fission. However, when struck with a neutron, it transforms into fissile uranium-233 (U233). This U233 can be used as fuel in nuclear reactors.

          Thorium-Based Reactors: Thorium-based reactors are being developed around the world, especially in India. These reactors are considered safer and produce less radioactive waste than uranium reactors. India’s three-stage nuclear power program is designed to utilize its vast reserves of thorium.

          Low Carbon Emissions: Thorium-fired nuclear reactors help reduce carbon emissions by reducing dependence on fossil fuels, thereby helping to combat climate change.

          Industrial and Traditional Uses:

          Thorium’s use isn’t limited to nuclear energy; it also has some other important uses:

          Gas lantern mantles: In ancient times, thorium dioxide (ThO2) was used to make gas lantern mantles. These mantles gave off a bright white light when heated.

          Alloys: Thorium is combined with metals like magnesium to create high-strength alloys. These alloys are used in aircraft engines and the aerospace industry, where lightweight and strong materials are required.

          Catalysts: Thorium dioxide is also used as a catalyst in some chemical processes.

          Electronic equipment: Thorium is used in certain types of electronic equipment and optical lenses.

          Welding electrodes: Thorium is often used in combination with tungsten to make welding electrodes (TIG welding), although its use is gradually declining due to concerns about radioactivity.

          Uses of Thorium and Its Impact on the Environment and Health:-

          Overall, thorium’s greatest importance lies in its role as a nuclear fuel, which could provide a clean and safe alternative to meet growing energy demands in the future.

          Using Thorium: It’s important to consider certain environmental and health risks when using thorium. Let’s understand these risks:

          Radioactivity and Radiation Exposure:-

          Weak Radioactivity: Thorium is a radioactive element. Its most common isotope, thorium-232, slowly decays to form several radioactive byproducts, including gases such as radium and radon.

          Health Effects: Inhaling or ingesting radioactive particles through dust and gases, whether used or mined, can be harmful to health. This can lead to the risk of lung cancer and other serious illnesses.

           

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          नवरात्रि: व्रत और इसका महत्व

          नवरात्रि: व्रत और इसका महत्व

          नवरात्रि एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए समर्पित है। यह त्योहार पूरे भारत में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

          नवरात्रि के दौरान, बहुत से लोग नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जिसे उपवास भी कहते हैं। इस व्रत के पीछे कई कारण और मान्यताएं हैं:

          • शारीरिक और मानसिक शुद्धि: व्रत रखने से शरीर और मन को शुद्ध करने में मदद मिलती है। इन नौ दिनों के दौरान, लोग अनाज, दालें और मांसाहारी भोजन से परहेज करते हैं, और केवल फल, दूध, और व्रत के लिए विशेष रूप से बनाए गए भोजन (जैसे कुट्टू का आटा, साबूदाना) का सेवन करते हैं। यह एक प्रकार का डिटॉक्स माना जाता है जो पाचन तंत्र को आराम देता है और शरीर को हल्का महसूस कराता है।
          • आध्यात्मिक लाभ: व्रत के माध्यम से व्यक्ति अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करना सीखता है और मन को शांत करता है। यह देवी शक्ति के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को दर्शाता है।
          • आत्म-नियंत्रण और अनुशासन: उपवास एक तरह से आत्म-नियंत्रण का अभ्यास है। यह हमें अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करने और जीवन में अनुशासन लाने में मदद करता है।

          नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा

          नवरात्रि का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जो देवी दुर्गा और महिषासुर नामक राक्षस के बीच हुए युद्ध से जुड़ी है।

          महिषासुर एक बहुत ही शक्तिशाली राक्षस था जिसने भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि उसे कोई भी देवता या पुरुष नहीं मार सकता। इस वरदान के बाद, वह बहुत अहंकारी हो गया और उसने तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, और पाताल) में हाहाकार मचा दिया। उसने देवताओं को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया और स्वयं स्वर्गलोक पर राज करने लगा।

          जब सभी देवता महिषासुर के अत्याचारों से परेशान हो गए, तो उन्होंने त्रिदेवों (भगवान ब्रह्मा, विष्णु, और महेश) से मदद मांगी। तब, त्रिदेवों ने अपनी शक्तियों को मिलाकर एक महाशक्ति को जन्म दिया, जिन्हें देवी दुर्गा के रूप में जाना जाता है। देवी दुर्गा को हर देवता ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र दिए। भगवान शिव ने उन्हें त्रिशूल दिया, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र, और भगवान इंद्र ने वज्र दिया।

          इसके बाद, देवी दुर्गा ने महिषासुर के साथ नौ दिनों तक भयंकर युद्ध किया। इस दौरान महिषासुर ने अपने रूप बदलकर देवी को छलने का प्रयास किया, लेकिन देवी दुर्गा ने अपने विभिन्न रूपों और शक्तियों से उसे हराया। अंत में, नौवें दिन, देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया और सृष्टि को उसके आतंक से मुक्त किया।

          यह जीत नवमी के दिन हुई, और इस जीत के सम्मान में, नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। दशहरा का त्योहार इसी विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जब भगवान राम ने रावण का वध किया था, जिसे विजयदशमी भी कहते हैं।

          क्या आप नवरात्रि से जुड़े किसी और विषय के बारे में जानना चाहेंगे, जैसे इसके नौ रूप या विभिन्न राज्यों में इसे कैसे मनाया जाता है?

          नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। हर दिन एक विशेष रूप को समर्पित होता है।

          नवरात्रि के 9 दिन  की पूजा :

          पहला दिन: शैलपुत्री

          यह देवी दुर्गा का पहला रूप हैं। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनका वाहन वृषभ (बैल) है और इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल का फूल होता है।

          दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी

          देवी का यह रूप तपस्या और वैराग्य का प्रतीक है। इनके दाहिने हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है।

          तीसरा दिन: चंद्रघंटा

          इस रूप में देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। यह रूप शांति, साहस और निडरता का प्रतीक माना जाता है।

          चौथा दिन: कूष्मांडा

          यह माना जाता है कि देवी कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें ‘सृष्टि की आदि शक्ति’ भी कहा जाता है।

          पाँचवाँ दिन: स्कंदमाता

          देवी का यह रूप भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता का है। इन्हें ममता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

          छठा दिन: कात्यायनी

          देवी का यह रूप महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में जाना जाता है। इन्हें दुष्टों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।

          सातवाँ दिन: कालरात्रि

          यह देवी का सबसे उग्र और भयानक रूप है, जो अंधकार और अज्ञान का नाश करता है। यह रूप बुराई का नाश करने का प्रतीक है।

          आठवाँ दिन: महागौरी

          यह देवी का शांत और सौम्य रूप है। महागौरी की पूजा से पापों का नाश होता है और जीवन में पवित्रता आती है।

          नौवाँ दिन: सिद्धिदात्री

          देवी का यह रूप सभी प्रकार की सिद्धियाँ (अलौकिक शक्तियाँ) देने वाला है। ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

          ये नौ रूप मिलकर देवी दुर्गा की पूर्ण शक्ति और उनके विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं।

          नवरात्रि के नौ दिनों में हर देवी को एक विशेष रंग और प्रसाद चढ़ाने का भी महत्व है। यह रंग और प्रसाद देवी के गुणों और शक्तियों को दर्शाते हैं।

          पहला दिन: शैलपुत्री

          • रंग: नारंगी  – यह रंग ऊर्जा और खुशी का प्रतीक है।
          • प्रसाद: गाय का घी।

          दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी

          • रंग: सफेद  – यह शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक है।
          • प्रसाद: शक्कर (चीनी)।

          तीसरा दिन: चंद्रघंटा

          • रंग: लाल  – यह शक्ति, प्रेम और साहस का प्रतीक है।
          • प्रसाद: खीर या दूध से बनी मिठाई।

          चौथा दिन: कूष्मांडा

          • रंग: शाही नीला – यह रंग समृद्धि और राजसी शक्ति का प्रतीक है।
          • प्रसाद: मालपुआ।

          पाँचवाँ दिन: स्कंदमाता

          • रंग: पीला – यह खुशी, उत्साह और ज्ञान का प्रतीक है।
          • प्रसाद: केले।

          छठा दिन: कात्यायनी

          • रंग: हरा  – यह प्रकृति, विकास और नई शुरुआत का प्रतीक है।
          • प्रसाद: शहद।

          सातवाँ दिन: कालरात्रि

          • रंग: भूरा – यह रंग शक्ति, समर्पण और स्थिरता का प्रतीक है।
          • प्रसाद: गुड़।

          आठवाँ दिन: महागौरी

          • रंग: बैंगनी  – यह रंग आध्यात्मिकता और ज्ञान का प्रतीक है।
          • प्रसाद: नारियल।

          नौवाँ दिन: सिद्धिदात्री

          • रंग: मोरपंख हरा – यह रंग इच्छाओं की पूर्ति और नई उम्मीदों का प्रतीक है।
          • प्रसाद: तिल, चने और हलवा।

          यह रंग और प्रसाद हर दिन की पूजा को और भी विशेष बनाते हैं।

          भारत में माता के कई प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। इनमें से कुछ सबसे महत्वपूर्ण मंदिर नीचे दिए गए हैं:

          • मैहर देवी मंदिर, जिसे शारदा माता मंदिर भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित एक बहुत प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह मंदिर त्रिकूट पर्वत पर लगभग 600 फीट की ऊंचाई पर है।
          • विंध्याचल मंदिर, जिसे माँ विंध्यवासिनी मंदिर भी कहते हैं, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में गंगा नदी के तट पर स्थित एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह एक प्रमुख शक्तिपीठ है और देवी दुर्गा को समर्पित है।
          • वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू और कश्मीर: त्रिकुटा पर्वत पर स्थित यह मंदिर भारत के सबसे लोकप्रिय शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ हर साल लाखों भक्त माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आते हैं।
          • ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित यह मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहाँ कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि नौ ज्वालाएँ लगातार जलती रहती हैं, जो देवी के नौ रूपों का प्रतीक हैं।
          • कामाख्या मंदिर, असम: गुवाहाटी में स्थित यह मंदिर भी एक प्रमुख शक्तिपीठ है। यह भारत के सबसे प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों में से एक माना जाता है। यहाँ देवी की मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि उनके ‘योनि’ रूप की पूजा की जाती है।
          • महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर, महाराष्ट्र: यह मंदिर देवी महालक्ष्मी को समर्पित है। यहाँ दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं, खासकर नवरात्रि के दौरान।
          • कालिका मंदिर, कालीघाट, पश्चिम बंगाल: यह मंदिर कोलकाता में हुगली नदी के किनारे स्थित है और देवी काली को समर्पित है। यह भी 51 शक्तिपीठों में से एक है।
          • नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश: यह मंदिर बिलासपुर जिले में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ देवी सती की आँखें गिरी थीं, इसलिए इस स्थान का नाम नैना देवी पड़ा।
          • करणी माता मंदिर, राजस्थान: बीकानेर के पास स्थित यह मंदिर “चूहों वाले मंदिर” के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहाँ हजारों चूहे रहते हैं, जिन्हें पवित्र माना जाता है।
          • अंबाजी माता मंदिर, गुजरात: यह मंदिर गुजरात के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक श्रीयंत्र स्थापित है।

          यह कुछ सबसे प्रमुख मंदिर हैं, जहाँ नवरात्रि के समय विशेष पूजा-अर्चना और उत्सव होते हैं। नवरात्रि के दौरान यहाँ भारी भीड़ होती है, क्योंकि इस समय पूजा और उत्सव का विशेष महत्व होता है।

          थोरियम के गुण-एक विश्लेषण

          थोरियम के गुण और विशेषताएँ - एक विश्लेषण

          थोरियम (Thorium) के गुण और विशेषताएँ – एक विश्लेषण

                                          थोरियम एक कमजोर रेडियोधर्मी रासायनिक तत्व है। इसका प्रतीक Th और परमाणु संख्या 90 है। यह प्रकृति में पाया जाने वाला एक धातु है, जिसका नाम स्कैंडिनेवियाई पौराणिक कथाओं के देवता, थोर के नाम पर रखा गया है।थोरियम के गुण और विशेषताएँ

          • रेडियोधर्मिता: थोरियम एक धीमी गति से विघटित होने वाला रेडियोधर्मी तत्व है। इसका सबसे स्थिर आइसोटोप थोरियम-232 (Th232) है, जिसका आधा जीवन  14.05 बिलियन वर्ष है।
          • भौतिक गुण: यह एक नरम, चांदी जैसी-सफेद धातु है जो हवा के संपर्क में आने पर काली हो जाती है। यह उच्च तापमान पर पिघलता है।
          • थोरियम चक्र: यह एक महत्वपूर्ण नाभिकीय ईंधन है क्योंकि यह न्यूट्रॉन को अवशोषित करके यूरेनियम-233 (U233) में बदल सकता है, जो एक विखंडनीय पदार्थ है और परमाणु रिएक्टरों में ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

          थोरियम कहाँ पाया जाता है:-

          थोरियम का सबसे बड़ा भंडार भारत में है। इसके बाद, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और तुर्की जैसे देशों में भी महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं।

          भारत के पास दुनिया के थोरियम भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो कि कुल वैश्विक भंडार का लगभग 25-30% है। भारत में थोरियम मुख्य रूप से मोनज़ाइट रेत के रूप में पाया जाता है।

          • तटीय क्षेत्र: भारत के अधिकांश थोरियम भंडार देश के पूर्वी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में स्थित हैं।
          • राज्य: सबसे बड़े भंडार केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में हैं। इसके अलावा ओडिशा, झारखंड और बिहार में भी थोरियम के भंडार मौजूद हैं।

          भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में थोरियम का उपयोग एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसका लक्ष्य देश के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करके ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

          विश्व में थोरियम के अन्य प्रमुख भंडार

          भारत के अलावा, कई अन्य देशों में भी थोरियम के महत्वपूर्ण भंडार हैं, जो इस प्रकार हैं:

          • ब्राजील: ब्राजील में भी थोरियम के बड़े भंडार हैं, जो मुख्य रूप से तटीय रेत में पाए जाते हैं।
          • ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया के पास भी थोरियम के प्रचुर भंडार हैं।
          • अमेरिका: संयुक्त राज्य अमेरिका में, विशेष रूप से इडाहो और मोंटाना में थोरियम के बड़े भंडार हैं।
          • तुर्की: तुर्की में भी थोरियम के बड़े भंडार होने की पुष्टि हुई है।
          • मिस्र: मिस्र के नील डेल्टा क्षेत्र में भी थोरियम के भंडार पाए जाते हैं।

          थोरियम का उपयोग:-

          थोरियम का उपयोग कई क्षेत्रों में होता है, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा है। इसके अलावा, इसके कुछ पारंपरिक और औद्योगिक उपयोग भी हैं।

          1. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)

          थोरियम का सबसे महत्वपूर्ण और भविष्य का उपयोग परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में है।

          • नाभिकीय ईंधन: थोरियम-232 (Th232) एक फर्टाइल पदार्थ है, जिसका अर्थ है कि यह सीधे तौर पर विखंडन (fission) के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लेकिन, जब इसे न्यूट्रॉन से टकराया जाता है, तो यह विखंडनीय (fissile) यूरेनियम-233 (U233) में बदल जाता है। यह U233 परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
          • थोरियमआधारित रिएक्टर: दुनिया भर में, खासकर भारत में, थोरियम-आधारित रिएक्टरों को विकसित किया जा रहा है। इन रिएक्टरों को यूरेनियम रिएक्टरों की तुलना में अधिक सुरक्षित और कम रेडियोधर्मी कचरा उत्पन्न करने वाला माना जाता है। भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम थोरियम के विशाल भंडार का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
          • कम कार्बन उत्सर्जन: थोरियम से चलने वाले परमाणु रिएक्टर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके कार्बन उत्सर्जन को घटाने में मदद करते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायता मिलती है।
          1. औद्योगिक और पारंपरिक उपयोग

          थोरियम का उपयोग केवल परमाणु ऊर्जा तक ही सीमित नहीं है, इसके कुछ अन्य महत्वपूर्ण उपयोग भी हैं:

          • गैस लालटेन के मेंटल: पुराने समय में, थोरियम डाइऑक्साइड (ThO2) का उपयोग गैस लालटेन के मेंटल (जालियाँ) बनाने में होता था। ये मेंटल गर्म होने पर चमकदार सफेद रोशनी देते थे।
          • मिश्र धातु (Alloy): थोरियम को मैग्नीशियम जैसी धातुओं के साथ मिलाकर उच्च-शक्ति वाली मिश्र धातुएँ बनाई जाती हैं। इन मिश्र धातुओं का उपयोग विमानों के इंजन और एयरोस्पेस उद्योग में किया जाता है, जहाँ हल्के और मजबूत सामग्री की आवश्यकता होती है।
          • उत्प्रेरक (Catalyst): थोरियम डाइऑक्साइड का उपयोग कुछ रासायनिक प्रक्रियाओं में एक उत्प्रेरक के रूप में भी किया जाता है।
          • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: कुछ विशेष प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ऑप्टिकल लेंसों में थोरियम का उपयोग होता है।
          • वेल्डिंग इलेक्ट्रोड: थोरियम को अक्सर टंगस्टन के साथ मिलाकर वेल्डिंग इलेक्ट्रोड (TIG वेल्डिंग) बनाने में इस्तेमाल किया जाता है, हालांकि रेडियोधर्मिता की चिंताओं के कारण इसका उपयोग धीरे-धीरे कम हो रहा है।

          थोरियम का उपयोग और पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव:

          कुल मिलाकर, थोरियम का सबसे बड़ा महत्व इसके परमाणु ईंधन के रूप में है, जो भविष्य में ऊर्जा की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित विकल्प प्रदान कर सकता है।

          थोरियम का प्रयोग: थोरियम का प्रयोग करते समय पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी कुछ जोखिमों को ध्यान में रखना ज़रूरी है। आइए, इन जोखिमों को समझते हैं:

          1. रेडियोधर्मिता और विकिरण जोखिम
          • कमजोर रेडियोधर्मिता: थोरियम एक रेडियोधर्मी तत्व है। इसका सबसे सामान्य आइसोटोप, थोरियम-232, धीरे-धीरे क्षय होकर कई रेडियोधर्मी उप-उत्पादों का निर्माण करता है, जिसमें रेडियम और रेडॉन जैसी गैसें शामिल हैं।
          • स्वास्थ्य प्रभाव: थोरियम का उपयोग करते समय या उसके खनन के दौरान, धूल और गैसों के माध्यम से रेडियोधर्मी कणों का साँस लेना या निगलना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे फेफड़ों के कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियाँ होने का खतरा होता है। यही कारण है कि इसे बहुत सावधानी से संभाला जाता है।
          1. परमाणु कचरे का प्रबंधन
          • कम खतरनाक कचरा: पारंपरिक यूरेनियम-आधारित रिएक्टरों की तुलना में, थोरियम-आधारित रिएक्टरों से निकलने वाला परमाणु कचरा कम मात्रा में और कम समय तक रेडियोधर्मी रहता है। यह थोरियम का एक बड़ा फायदा है।
          • फिर भी, प्रबंधन की चुनौती: हालांकि कचरा कम खतरनाक होता है, फिर भी इसे सुरक्षित रूप से संग्रहित और प्रबंधित करना एक बड़ी चुनौती है।
          1. खनन और पर्यावरण पर असर
          • मोनज़ाइट खनन: थोरियम अक्सर मोनज़ाइट रेत से निकाला जाता है। इस खनन प्रक्रिया के दौरान, बड़े पैमाने पर रेत को धोया जाता है, जिससे स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और तटीय क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
          • प्रदूषण: खनन से निकलने वाले अपशिष्ट जल में रेडियोधर्मी और अन्य जहरीले पदार्थ हो सकते हैं, जिससे मिट्टी और पानी का प्रदूषण हो सकता है।

          थोरियम के उपयोग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ खास सावधानियाँ बरतना बहुत ज़रूरी है:

          • सुरक्षित खनन और प्रसंस्करण: थोरियम के खनन और प्रसंस्करण के लिए कड़े सुरक्षा नियम और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि रेडियोधर्मी प्रदूषण को कम किया जा सके।
          • विकिरण सुरक्षा: थोरियम से जुड़े कर्मचारियों और आसपास के समुदायों को विकिरण से बचाने के लिए उचित उपाय करना आवश्यक है।
          • कचरा प्रबंधन: परमाणु कचरे के सुरक्षित और प्रभावी प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ बनाना ज़रूरी है।

          हालांकि थोरियम को एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जाता है क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन की तरह कार्बन उत्सर्जन नहीं करता, फिर भी इसके रेडियोधर्मी गुणों के कारण इसका प्रबंधन बहुत ही सावधानी से किया जाना चाहिए।

           

          थोरियम का भविष्य

          भविष्य में थोरियम को परमाणु ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत माना जा रहा है, खासकर भारत जैसे देशों के लिए जहाँ इसका प्रचुर भंडार है। थोरियम-आधारित रिएक्टरों से ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण को लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ये कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं और कम समय तक रेडियोधर्मी रहने वाला कचरा उत्पन्न करते हैं। हालांकि, इन रिएक्टरों को व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने में अभी भी तकनीकी और आर्थिक चुनौतियाँ हैं।

           

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          Rare Earth Elements : An Introduction

          Rare Earth Elements

          Rare Earth Elements : An Introduction  

          Rare Earth Elements
          Rare Earth Elements

          Rare Earth Elements are a group of 17 metals, including 15 lanthanide elements, Scandium, and Yttrium. These elements are found in the third group of the periodic table. Although the word ‘rare’ is in their name, they are quite abundant in the Earth’s crust. Some of them, like Cerium, are as common as copper.

          These elements are called rare because they are often very scattered, making it difficult to find and extract them in sufficient quantities from minerals.

          Uses :- Rare earth elements are very important in modern technology and defense industries. Some of their key uses are:

          • Magnets: Neodymium and Dysprosium are used to create high-strength permanent magnets, which are used in electric vehicles, wind turbines, and smartphones.
          • Electronics: They are used in smartphones, computers, and television screens. Elements like Europium and Terbium help create vibrant colors (red and green) in displays.
          • Petroleum Refining: Cerium is used as a catalyst to purify petroleum.
          • Defense Equipment: They are used in advanced defense equipment such as rockets, missiles, drones, and fighter jets.
          • Medical: Gadolinium is used as a contrast agent in MRI scans.

          There are a total of 17 rare earth elements. They include:

          • 15 Lanthanide Elements: Lanthanum, Cerium, Praseodymium, Neodymium, Promethium, Samarium, Europium, Gadolinium, Terbium, Dysprosium, Holmium, Erbium, Thulium, Ytterbium, and Lutetium.
          • Two Other Elements: Scandium and Yttrium.

          All these elements are found in the third group of the periodic table.

          Sources and Major Producers : Rare earth elements are found in many places on the Earth’s surface but are mainly extracted from specific minerals. The most common minerals are:

          • Monazite: This is a reddish-brown phosphate mineral containing lanthanide elements, thorium, and yttrium. It is found in countries like India, Brazil, and the United States.
          • Bastnasite: This is a fluorocarbonate mineral found mainly in China and the United States. It is the largest source of rare earth elements in China.
          • Loparite: This is an important mineral found in Russia.

          Major Producing Countries : The production of rare earth elements in the world is limited to a few countries.

          • China: China is the world’s largest producer and controls a large portion of the global supply. China has large reserves of Bastnasite and ion-adsorption clays.
          • United States: The Mountain Pass mine in California is a major source in the US.
          • Australia: Australia also produces rare earth elements.
          • India: India has significant reserves in the form of monazite sands, especially in coastal areas.

          The process of extracting and purifying these elements is complex and environmentally impactful because these minerals are often found with radioactive elements like thorium.

          Extraction and Purification Process : Purifying rare earth elements is a complex and multi-step process. This process depends on the type of minerals and the mixture of elements present in them. Rare earth elements are primarily purified by two methods:

          • Solvent Extraction: This is the most common and effective method. In this process, rare earth elements are separated based on their chemical properties.
            • First, the raw mineral is ground into a fine powder and mixed into a solution (like sulfuric acid). The rare earth elements are separated from this solution.
            • Next, this solution is mixed with an organic solvent. This solvent reacts with only specific rare earth elements.
            • After the reaction, the two solutions separate. One solution contains the purified elements, while the other contains impurities and the remaining elements.
            • This process is repeated many times to extract different elements according to their purity.
          • Ion Exchange: This method is used to obtain high-purity elements.
            • It uses a special type of resin that can absorb ions.
            • When the rare earth element solution passes through this resin, the resin holds back the ions of some elements, while the rest pass through.
            • This process also happens in multiple stages, allowing each element to be separated.

          Challenges

          • Similar Chemical Properties: All rare earth elements have very similar chemical properties, which makes separating them extremely difficult. This is why the process is done in multiple stages.
          • Environmental Impact: The extraction and purification process often use harmful chemicals, which can cause water and soil pollution. Some minerals also contain radioactive elements, which raises safety concerns.
          • High Cost: This process is very expensive because it requires advanced technology and a lot of energy.

          Due to these challenges, only a few countries in the world can purify large quantities of rare earth elements. China is a leader in this field.

           

          Key and Most Used Rare Earth Elements

          Some of the key and most used rare earth elements out of the 17 are as follows:

          1. Neodymium
            • Use: It is the most important rare earth element. It is used to make ultra-strong neodymium magnets.
            • Importance: These magnets are essential for the motors of electric vehicles (EVs), wind turbines, smartphones, headphones, and computer hard drives. Their high magnetic strength makes them indispensable for modern technology.
          2. Dysprosium
            • Use: Dysprosium is often mixed with Neodymium.
            • Importance: It helps the neodymium magnets maintain their magnetic strength at high temperatures. In electric vehicles and wind turbines, where motors get very hot, the use of Dysprosium keeps the magnets stable.
          3. Cerium
            • Use: Cerium is the most abundant rare earth element. It is mainly used as a catalyst in petroleum refining.
            • Importance: It helps reduce harmful gases in the catalytic converters of automobiles. It is also used in polishing powders and some types of glass.
          4. Lanthanum
            • Use: It is used in the batteries of hybrid cars, such as nickel-metal hydride (NiMH) batteries.
            • Importance: It helps the batteries hold more charge and not discharge quickly. It is also used to make camera lenses and other optical equipment.
          5. Yttrium
            • Use: Yttrium is commonly used to create red-colored phosphors in television and computer displays.
            • Importance: It makes the displays bright and colorful. It is also used to make some special types of lasers and superconductors.

          These elements are important because they are used in modern technologies that are crucial for our daily lives and industrial development.

           

           

          Iron का सेवन और लाभ

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          Iron (लोहा) : शरीर के लिए आवश्यक तत्व -सेवन और लाभ

          Benefit of Iron
          Benefit of Iron

          Iron (लोहा) हमारे शरीर के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खनिज है, और इसके बिना हमारा शरीर ठीक से काम नहीं कर पाएगा। जब शरीर में लोहे की कमी होती है, तो थकान, कमजोरी, सांस फूलना, और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। खासकर महिलाओं, बच्चों और शाकाहारी लोगों में लोहे की कमी होने की संभावना अधिक होती है।

          शरीर में Iron के मुख्य कार्य:-

          • हीमोग्लोबिन बनाना (Hemoglobin Formation): यह लोहे का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जो हमारी लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) में पाया जाता है। इसका काम है फेफड़ों से ऑक्सीजन को पूरे शरीर के अंगों और ऊतकों तक पहुँचाना। अगर शरीर में लोहे की कमी होती है, तो हीमोग्लोबिन भी कम बनता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस स्थिति को एनीमिया (Anemia) कहते हैं।
          • मांसपेशियों के लिए ऑक्सीजन (Oxygen for Muscles): लोहा मांसपेशियों में पाए जाने वाले एक प्रोटीन मायोग्लोबिन (Myoglobin) का भी एक हिस्सा है। मायोग्लोबिन मांसपेशियों में ऑक्सीजन को स्टोर करता है, जिससे वे सही तरीके से काम कर पाती हैं।
          • ऊर्जा का उत्पादन (Energy Production): लोहा हमारे शरीर में ऊर्जा बनाने वाले एंजाइमों (enzymes) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें दिन भर सक्रिय और ऊर्जावान रहने में मदद करता है।
          • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System): लोहा हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को मजबूत बनाए रखने में भी मदद करता है, जिससे हम बीमारियों से लड़ पाते हैं।
          • मस्तिष्क का विकास (Brain Development): बच्चों और किशोरों में मस्तिष्क के सही विकास और कामकाज के लिए भी लोहा बहुत जरूरी है।

          Iron की कमी से क्या होता है?

          जब शरीर में लोहे की कमी होती है, तो थकान, कमजोरी, सांस फूलना, और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। खासकर महिलाओं, बच्चों और शाकाहारी लोगों में लोहे की कमी होने की संभावना अधिक होती है।

          अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में लोहे की कमी हो सकती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। वे आपको सही आहार या सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं।

           

          एनीमिया के लक्षण क्या हैं?

          एनीमिया के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी बढ़ चुकी है। शुरुआत में, आपको कोई खास लक्षण महसूस नहीं हो सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है, लक्षण साफ दिखने लगते हैं।

          एनीमिया के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

          सबसे आम लक्षण

          • थकान और कमजोरी: यह एनीमिया का सबसे आम लक्षण है। शरीर के ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे आप हर समय थका हुआ और कमजोर महसूस करते हैं, यहाँ तक कि मामूली काम करने पर भी।
          • सांस फूलना: शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण थोड़ा सा चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर भी सांस फूलने लगती है।
          • पीली त्वचा: हीमोग्लोबिन की कमी से त्वचा, नाखून, और आँखों के नीचे का हिस्सा पीला दिखाई देने लगता है।

          अन्य लक्षण

          • चक्कर आना या सिरदर्द: मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से चक्कर आ सकते हैं या सिर में दर्द हो सकता है।
          • दिल की धड़कन तेज होना या अनियमित होना: शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धड़कन तेज हो जाती है।
          • हाथ-पैर ठंडे रहना: खराब रक्त संचार (circulation) के कारण हाथ और पैर ठंडे महसूस हो सकते हैं।
          • नाखून कमजोर होना: नाखून कमजोर और टूटने लगते हैं। कुछ मामलों में, नाखून चम्मच के आकार के (spoon-shaped) भी हो सकते हैं।
          • बालों का झड़ना: बालों का झड़ना भी एनीमिया का एक लक्षण हो सकता है।
          • कमजोर एकाग्रता: ऑक्सीजन की कमी से ध्यान लगाने और सोचने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

          यदि आप इन लक्षणों में से कोई भी लक्षण महसूस करते हैं, खासकर अगर वे लंबे समय से बने हुए हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ज़रूरी है। वे सही जांच करके एनीमिया का पता लगा सकते हैं और इसका उचित इलाज शुरू कर सकते हैं।

           

          आयरन के मुख्य लाभ

          आयरन यानी लोहा, हमारे शरीर के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। इसके कई लाभ हैं जो हमारे पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

          1. ऊर्जा और स्फूर्ति बढ़ाए: आयरन का सबसे बड़ा लाभ है ऊर्जा उत्पादन में मदद करना। यह हीमोग्लोबिन का एक ज़रूरी हिस्सा है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन को पूरे शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचाता है। जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, तो आप ज़्यादा ऊर्जावान महसूस करते हैं और थकान कम होती है।
          2. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मज़बूत करे: आयरन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उन कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है जो शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाती हैं।
          3. दिमाग़ के काम को बेहतर बनाए: दिमाग़ के सही विकास और कार्यक्षमता के लिए आयरन ज़रूरी है। यह न्यूरोट्रांसमीटर (neurotransmitters) के उत्पादन में मदद करता है जो दिमाग़ के संकेतों को नियंत्रित करते हैं। पर्याप्त आयरन मिलने से एकाग्रता, याददाश्त और सीखने की क्षमता बेहतर होती है।
          4. गर्भावस्था में सहायक: गर्भवती महिलाओं के लिए आयरन बहुत ज़रूरी है। यह माँ और भ्रूण दोनों के लिए पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन सुनिश्चित करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी से समय से पहले प्रसव या बच्चे का वजन कम होने का खतरा बढ़ सकता है।
          5. मांसपेशियों को सही ढंग से काम करने में मदद करे: आयरन मांसपेशियों में मायोग्लोबिन नामक प्रोटीन का हिस्सा होता है, जो मांसपेशियों में ऑक्सीजन को स्टोर करता है। यह मांसपेशियों को सही ढंग से काम करने और व्यायाम के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है।
          6. बालों और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए: शरीर में आयरन की कमी से बाल झड़ने लगते हैं और त्वचा पीली दिखती है। पर्याप्त आयरन का सेवन स्वस्थ बालों और चमकदार त्वचा को बनाए रखने में मदद करता है, क्योंकि यह कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाता है जो उनके पोषण के लिए ज़रूरी है।

          इन सभी लाभों को पाने के लिए, हमें अपने आहार में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

          क्या आयरन के कोई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं?

          हाँ, बिल्कुल। जहाँ एक तरफ आयरन हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी है, वहीं दूसरी तरफ, इसकी ज़्यादा मात्रा शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकती है। इसे आयरन ओवरलोड या आयरन विषाक्तता (Iron Toxicity) कहते हैं।

          आयरन के साइड इफेक्ट्स आमतौर पर दो स्थितियों में दिखते हैं:

          1. आयरन सप्लीमेंट लेने पर होने वाले सामान्य साइड इफेक्ट्स: अगर आप डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ये आमतौर पर गंभीर नहीं होते और शरीर के सप्लीमेंट के अभ्यस्त होने पर चले जाते हैं।
          • पेट से जुड़ी समस्याएं: पेट में दर्द, कब्ज, मतली (nausea), उल्टी, और दस्त (diarrhea)।
          • मल का रंग बदलना: आयरन सप्लीमेंट लेने पर मल का रंग काला या गहरा हरा हो सकता है, जो सामान्य है।
          1. शरीर में बहुत ज़्यादा आयरन जमा होने पर होने वाले गंभीर साइड इफेक्ट्स: यह स्थिति तब होती है जब शरीर में ज़रूरत से कहीं ज़्यादा आयरन जमा हो जाता है। यह कुछ अनुवांशिक बीमारियों (जैसे हीमोक्रोमैटोसिस) या लंबे समय तक बहुत ज़्यादा मात्रा में आयरन सप्लीमेंट लेने से हो सकता है।

          आयरन ओवरलोड के गंभीर लक्षण और दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं:

          • अंगों को नुकसान: अतिरिक्त आयरन शरीर के अंगों, विशेष रूप से लीवर, हृदय (दिल), और अग्न्याशय (pancreas) में जमा होने लगता है। इससे इन अंगों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
          • लीवर की समस्याएं: लीवर में आयरन जमा होने से लीवर सिरोसिस या लीवर फेलियर हो सकता है।
          • हृदय संबंधी समस्याएं: दिल में आयरन के जमाव से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है या हृदय रोग हो सकते हैं।
          • मधुमेह (Diabetes): अग्न्याशय में ज़्यादा आयरन जमा होने से यह ठीक से काम नहीं कर पाता, जिससे मधुमेह हो सकता है।
          • जोड़ों में दर्द: कुछ मामलों में, ज़्यादा आयरन जोड़ों में जमा होकर दर्द और सूजन का कारण बन सकता है।
          • थकान और कमजोरी: अत्यधिक आयरन भी लगातार थकान और कमजोरी का कारण बन सकता है।
          • त्वचा का रंग बदलना: त्वचा का रंग कांस्य (bronze) या भूरा हो सकता है।

          बच्चों में आयरन विषाक्तता

          बच्चों के लिए आयरन की अधिक मात्रा विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है। आयरन सप्लीमेंट्स का गलती से ज़्यादा मात्रा में सेवन बच्चों में जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए, आयरन सप्लीमेंट्स को बच्चों की पहुँच से हमेशा दूर रखना चाहिए।

          आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ :-

          आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ दो प्रकार के होते हैं: हेम आयरन (Heme Iron) और नॉन-हेम आयरन (Non-Heme Iron)

          • हेम आयरन मांसाहारी भोजन में पाया जाता है और शरीर इसे बहुत आसानी से अवशोषित कर लेता है।
          • नॉन-हेम आयरन पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में पाया जाता है और इसे अवशोषित करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसे बेहतर ढंग से अवशोषित करने के लिए विटामिन C से भरपूर चीज़ों के साथ खाया जाना चाहिए।

          यहाँ आयरन से भरपूर कुछ मुख्य खाद्य पदार्थों की सूची दी गई है:

           

          हेम आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ (मांसाहारी)

          • रेड मीट (लाल मांस): भेड़ का मांस, बकरे का मांस, और बीफ (beef) आयरन का बेहतरीन स्रोत हैं।
          • अंग मांस (Organ Meats): कलेजी (liver) और गुर्दे (kidneys) में आयरन की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है।
          • पोल्ट्री (Poultry): चिकन और टर्की में भी अच्छी मात्रा में आयरन पाया जाता है, खासकर डार्क मीट में।
          • मछली: सार्डिन (sardines), सालमन (salmon), टूना (tuna), और मैकरेल (mackerel) जैसी मछलियाँ आयरन से भरपूर होती हैं।
          • सीफूड: झींगा (shrimp), सीप (oysters), और क्लैम (clams) में भी आयरन की अच्छी मात्रा होती है।

           

          नॉन-हेम आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ (शाकाहारी)

          • दालें और फलियाँ: मसूर दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, और लोबिया आयरन के बहुत अच्छे स्रोत हैं।
          • हरी पत्तेदार सब्जियाँ: पालक, केल (kale), और सरसों का साग आयरन से भरपूर होते हैं। इन्हें विटामिन C वाले खाद्य पदार्थों (जैसे नींबू) के साथ खाने से आयरन का अवशोषण बेहतर होता है।
          • सूखे मेवे और बीज: कद्दू के बीज, तिल के बीज, अलसी के बीज, और सूरजमुखी के बीज आयरन का अच्छा स्रोत हैं।
          • मेवे (Nuts): काजू और बादाम में भी आयरन पाया जाता है।
          • अनाज: क्विनोआ (quinoa), ओट्स, और ब्राउन राइस। कई नाश्ते के अनाज भी आयरन से फोर्टिफाइड (मजबूत) होते हैं।
          • सूखे फल: किशमिश, खजूर, और आलूबुखारा (prunes) में भी आयरन की मात्रा होती है।
          • मशरूम: कुछ प्रकार के मशरूम में भी आयरन पाया जाता है।

          एक जरूरी सलाह

          नॉन-हेम आयरन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए, इन खाद्य पदार्थों को विटामिन C से भरपूर चीज़ों के साथ खाएं, जैसे नींबू का रस, संतरे, स्ट्रॉबेरी, या शिमला मिर्च।

          वहीं, चाय और कॉफी में पाए जाने वाले टैनिन (tannin) नॉन-हेम आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं, इसलिए इन्हें आयरन से भरपूर भोजन के तुरंत बाद पीने से बचना चाहिए।

          संक्षेप में, आयरन हमारे लिए ज़रूरी है, लेकिन इसका सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। सही मात्रा में आयरन का सेवन करने से इसके फायदे मिलते हैं और साइड इफेक्ट्स का खतरा कम हो जाता है।

           

           

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          Recruitment of Junior Executives (AAI)

          RECRUITMENT OF JUNIOR EXECUTIVES THROUGH  GATE 2023/GATE 2024/GATE 2025 

           

          एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने GATE 2023, 2024 और 2025 के स्कोर के माध्यम से जूनियर एग्जीक्यूटिव के पदों पर भर्ती के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती बिना किसी लिखित परीक्षा के सीधे GATE स्कोर और दस्तावेज़ सत्यापन (document verification) के आधार पर की जाएगी।

          AAI Vacancy

          शैक्षणिक योग्यता और GATE पेपर कोड (विषयवार)

          शैक्षणिक योग्यता और GATE पेपर कोड (विषयवार)
          शैक्षणिक योग्यता और GATE पेपर कोड (विषयवार)

          बेंचमार्क विकलांगताओं की श्रेणियां और बेंचमार्क विकलांगता (PwBD) वाले व्यक्तियों के लिए पहचाने गए पद

          शैक्षणिक योग्यता और GATE पेपर कोड (विषयवार)
          बेंचमार्क विकलांगताओं की उपयुक्त श्रेणियां और बेंचमार्क विकलांगता (PwBD)
          • जूनियर एग्जीक्यूटिव (आर्किटेक्चर):
            • योग्यता: आर्किटेक्चर में बैचलर डिग्री और आर्किटेक्चर काउंसिल में रजिस्ट्रेशन।
            • GATE पेपर कोड: AR (आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग)।
          • जूनियर एग्जीक्यूटिव (इंजीनियरिंग – सिविल):
            • योग्यता: सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री।
            • GATE पेपर कोड: CE (सिविल इंजीनियरिंग)।
          • जूनियर एग्जीक्यूटिव (इंजीनियरिंग – इलेक्ट्रिकल):
            • योग्यता: इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री।
            • GATE पेपर कोड: EE (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)।
          • जूनियर एग्जीक्यूटिव (इलेक्ट्रॉनिक्स):
            • योग्यता: इलेक्ट्रॉनिक्स/टेलीकम्युनिकेशन/इलेक्ट्रिकल में बैचलर डिग्री, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स में विशेषज्ञता हो।
            • GATE पेपर कोड: EC (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग)।
          • जूनियर एग्जीक्यूटिव (सूचना प्रौद्योगिकी):
            • योग्यता: कंप्यूटर साइंस/कंप्यूटर इंजीनियरिंग/आईटी/इलेक्ट्रॉनिक्स में बैचलर डिग्री या MCA।
            • GATE पेपर कोड: CS (कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी)।

              आवेदन कैसे करें:-

              • आधिकारिक वेबसाइट aai.aero पर जाएं।
              • “करियर” सेक्शन में जाकर भर्ती के लिंक पर क्लिक करें।
              • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें।
              • लॉग इन करें और आवेदन फॉर्म भरें।

                Application date
                Application date
              • आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें और आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
              • फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के संदर्भ के लिए प्रिंटआउट लें।

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          आरआरबी मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी भर्ती 2025

          आरआरबी मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी भर्ती 2025

          आरआरबी मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी भर्ती 2025

          आरआरबी (RRB) ने मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी भर्ती 2025 की अधिसूचना (CEN No: 07/2024) जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 1,036 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसमें जूनियर स्टेनोग्राफर, ट्रांसलेटर, शिक्षक, कुक, और अन्य पद शामिल हैं।

          आरआरबी मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी भर्ती 2025 अवलोकन
          भर्ती बोर्ड रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी)
          परीक्षा का नाम आरआरबी मंत्रिस्तरीय और पृथक श्रेणियां (आरआरबी एमआई)
          पदों जूनियर स्टेनोग्राफर, जूनियर अनुवादक, स्टाफ और कल्याण निरीक्षक, मुख्य विधि सहायक, रसोइया, पीजीटी, टीजीटी, शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक (पुरुष और महिला (ईएम)), सहायक अध्यापिका (जूनियर स्कूल), संगीत अध्यापिका, नृत्य अध्यापिका, प्रयोगशाला सहायक (स्कूल), मुख्य रसोइया, फिंगरप्रिंट परीक्षक
          रिक्तियां 1036
          पंजीकरण तिथियां 7 जनवरी से 6 फरवरी 2025
          परीक्षा का तरीका कंप्यूटर Online
          चयन प्रक्रिया चयन प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन चरण शामिल हैं:

          1. कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT): यह एक ऑनलाइन लिखित परीक्षा है।
          2. कौशल परीक्षण (Skill Test): यह पद के अनुसार भिन्न होता है, जैसे आशुलिपि, अनुवाद या शिक्षण कौशल परीक्षण।
          3. दस्तावेज़ सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण: अंतिम चरण में दस्तावेज़ों का सत्यापन और मेडिकल फिटनेस की जांच की जाती है।
          वेबसाइट https://www.rrbcdg.gov.in/
          आरआरबी मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी परीक्षा पैटर्न 2025 
          विषयों प्रश्नों की कुल संख्या कुल मार्क
          व्यावसायिक क्षमता 50 50
          सामान्य जागरूकता 15 15
          सामान्य बुद्धि और तर्क 15 15
          अंक शास्त्र  10 10
          सामान्य विज्ञान 10 10
          कुल  100 100

          महत्वपूर्ण तिथियां

          • अधिसूचना जारी होने की तिथि: 6 जनवरी 2025
          • ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि: 7 जनवरी 2025
          • ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 28 फरवरी 2025 (बढ़ाई गई)
          • आवेदन शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि: 1 से 2 मार्च 2025
          • आवेदन में सुधार (शुल्क के साथ): 13 से 22 मार्च 2025
          • कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) तिथि: 10 से 12 सितंबर 2025
          • आवेदन की स्थिति जारी: 12 जुलाई 2025
          • परीक्षा शहर और तिथि की जानकारी: परीक्षा तिथि से 10 दिन पहले
          • प्रवेश पत्र (Admit Card): परीक्षा तिथि से 4 दिन पहले
          आयु सीमा  न्यूनतम आयु सीमा: 18 वर्ष 

          अधिकतम आयु सीमा: 48 वर्ष 

          शैक्षणिक योग्यता  जिस पद के लिए उम्मीदवार ने आवेदन किया है उसके अनुसार 12वीं पास/स्नातक/स्नातकोत्तर 
          क्या अंतिम वर्ष के छात्र परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं? निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की अंतिम परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे वे अभ्यर्थी जिनके अंतिम परिणाम ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि के बाद घोषित किए जाएंगे, आवेदन न करें। 
          आरआरबी मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी के लिए आवेदन शुल्क
          श्रेणियाँ आवेदन शुल्क
          अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / दिव्यांग / महिला / ट्रांसजेंडर / अल्पसंख्यक / आर्थिक पिछड़ा वर्ग / पूर्व सैनिक Rs. 250
          अन्य श्रेणियाँ Rs. 500
          आरआरबी मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी 2025
          पदों रिक्तियां
          विभिन्न विषयों के स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) 187
          वैज्ञानिक पर्यवेक्षक (एर्गोनॉमिक्स और प्रशिक्षण) 03
          विभिन्न विषयों के प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) 338
          मुख्य विधि सहायक 54
          सरकारी वकील 20
          शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक (अंग्रेजी माध्यम) 18
          वैज्ञानिक सहायक/प्रशिक्षण 02
          कनिष्ठ अनुवादक (हिंदी) 130
          वरिष्ठ प्रचार निरीक्षक 03
          कर्मचारी एवं कल्याण निरीक्षक 59
          लाइब्रेरियन 10
          संगीत शिक्षिका (महिला) 03
          विभिन्न विषयों के प्राथमिक रेलवे शिक्षक 188
          सहायक अध्यापिका (महिला) (जूनियर स्कूल) 02
          प्रयोगशाला सहायक / स्कूल 07
          लैब सहायक ग्रेड 3 (रसायनज्ञ और धातुकर्मी) 12
          कुल 1036

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