1080 sq ft house plans (36 X 30)-120 Yard

Result Plot

Unlock Your Dream Home with Budget-Friendly 1080 Sq Ft House Plans!

1080 sq ft house plans (36 L X 30 W) // Budget-friendly house designs

30 Feet Width X 36 Feet Length House design Plan

(1080 Sq Feet-120 Gaj or 120 Yard House Plan)

आजकल सिटी में या उसके पास प्रॉपर्टी का रेट इतना ज्यादा हो गया है कि मिडिल क्लास पर्सन फ्लैट की भारी भरकम ईएमआई

में फंसना नहीं चाहता है| वह सिटी या शहर से बाहर  प्लॉट लेकर घर बनाना चाहता है। ये प्लॉट और घर दोनो बजट में आते हैं

और इसके लिए ज्यादा कर्ज का झंझट भी नहीं होता| इस पोस्ट में हम देखेंगे 1080 sq ft house plans हाउस के लिए सारे प्लान में से कौन सा प्लान हाउस डिजाइन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं और वो भी आपकी अपनी भाषा में।

Plan name :    36 Feet X 30 Feet House design Plan (1080 Sq Feet-120 Gaj or 120 Yard House Plan)

Budget-friendly house designs

इस प्लान में  हम 2 Room बना सकते हैं। अभी हमारे पास 36X30 डायमेंशन का प्लॉट है जिस में 30 फीट चौड़ाई है और 36 फीट लंबाई है। यह 120 स्क्वायर गज का प्लॉट है या हम 120 गज का प्लॉट भी कह सकते हैं|

पहले प्लान देखे-

120 Gaj House Plan
कमरे का आकार क्रम से है :-

1- पहला बेडरूम 13 फीट लंबाई और 12 फीट चौड़ाई का होगा।

2- दूसरा बेडरूम 13 फीट लंबाई और 12 फीट चौड़ाई का होगा।

3-घर में प्रवेश पहले हाल में होगी जो कि 11.5 फीट लंबाई और 13 फीट चौड़ाई का होगा।

4-लेफ्ट साइड में गेस्ट रूम होगा जो 11.5 फीट लंबाई और 11.5 फीट चौड़ाई का होगा।

5-बाथरूम और टॉयलेट के लिए हमने 5 फीट लंबाई और 9 फीट चौड़ाई दिया है।

6-  किचन 12 फीट चौड़ाई और 5 फीट लंबाई (Plot के अनुसार)  का होगा।

Note :- किचन की छत को स्टोरेज के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं अगर इसको 8 फीट या 9 फीट की ऊंचाई पर रखे।

7- सीढ़ी को हमने 8 फीट चौड़ाई और 11.5 फीट लंबाई  के बगल में दिया है जहां से टर्न लेकर ये रूफ पर चली जाएगी।

8-सीढ़ी के कमरे में छोटा वॉशरूम किया गया है। वॉशरूम सीढ़ी के लिए नीचे नहीं है

9-Kitchen के  पास OTS या शाफ्ट   दिया गया है।

 

अब इस Plan को दूसरे Angle से देखे :

 ⇓

120 Gaj House Plan

36 X 30  or 30 X 36 फीट में हमारे पास और भी प्लान है। हम जल्द ही नए प्लान के साथ मिलेंगे।

www.resultplot.com साइट पर आप Educational material देख सकते हैं।

950 sq ft house plans (38 X 25)-105 Yard

Result Plot

Unlock Your Dream Home with Budget-Friendly 950 Sq Ft House Plans!

950 sq ft house plans (38 L X 25 W) // Budget-friendly house designs

25 Feet Width X 38 Feet Length House design Plan

(950 Sq Feet-105 Gaj or 105 Yard House Plan)

आजकल सिटी में या उसके पास प्रॉपर्टी का रेट इतना ज्यादा हो गया है कि मिडिल क्लास पर्सन फ्लैट की भारी भरकम ईएमआई

में फंसना नहीं चाहता है| वह सिटी या शहर से बाहर  प्लॉट लेकर घर बनाना चाहता है। ये प्लॉट और घर दोनो बजट में आते हैं

और इसके लिए ज्यादा कर्ज का झंझट भी नहीं होता| इस पोस्ट में हम देखेंगे 950 sq ft house plans हाउस के लिए सारे प्लान में से कौन सा प्लान हाउस डिजाइन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं और वो भी आपकी अपनी भाषा में।

Plan name :    38 Feet X 25 Feet House design Plan (950 Sq Feet-105 Gaj or 105 Yard House Plan)

Budget-friendly house designs

इस प्लान में  हम 2 Room बना सकते हैं। अभी हमारे पास 38X25 डायमेंशन का प्लॉट है जिस में 25 फीट चौड़ाई है और 38 फीट लंबाई है। यह 105 स्क्वायर गज का प्लॉट है या हम 105 गज का प्लॉट भी कह सकते हैं|

पहले प्लान देखे-

38 X 25 House Plan
कमरे का आकार क्रम से है :-

1- पहला बेडरूम 12.6 फीट लंबाई और 11 फीट चौड़ाई का होगा।

2- दूसरा बेडरूम 12.6 फीट लंबाई और 11 फीट चौड़ाई का होगा।

3-घर में प्रवेश पहले हाल में होगी जो कि 14 फीट लंबाई और 15.6 फीट चौड़ाई का होगा।।

4-बाथरूम और टॉयलेट के लिए हमने 6.9 फीट लंबाई और 6.8 फीट चौड़ाई दिया है।

5-  किचन 5.8 फीट चौड़ाई और 9.5 फीट लंबाई का होगा।

Note :- किचन की छत को स्टोरेज के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं अगर इसको 8 फीट या 9 फीट की ऊंचाई पर रखे।

6- सीढ़ी को हमने Main Entry  के बगल में दिया है जहां से टर्न लेकर ये रूफ पर चली जाएगी।

7-Kitchen के  पास OTS या शाफ्ट   दिया गया है।

 

अब इस Plan को दूसरे Angle से देखे :

 ⇓

38 X 25 House Plan

38 X 25  or 25 X 38 फीट में हमारे पास और भी प्लान है। हम जल्द ही नए प्लान के साथ मिलेंगे।

www.resultplot.com साइट पर आप Educational material देख सकते हैं।

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो-सूरदास

                                                                                                                                                                           Result Plot

॥मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो |
भोर भयो गैयन के पाछे,

भोर भयो गैयन के पाछे,

 मधुवन मोहिं पठायो ।

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ॥

चार पहर बंसीबट भटक्यो,

साँझ परे घर आयो ॥

मैं बालक बहिंयन को छोटो,

छींको किहि बिधि पायो ।
ग्वाल बाल सब बैर परे हैं,

ग्वाल बाल सब बैर परे हैं,

बरबस मुख लपटायो ॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ॥

तू जननी मन की अति भोरी,

इनके कहे पतिआयो ।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है,

जिय तेरे कछु भेद उपजि है,

 जानि परायो जायो ॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ॥

यह लै अपनी लकुटि कमरिया,

बहुतहिं नाच नचायो ।
‘सूरदास’ तब बिहँसि जसोदा,

लै उर कंठ लगायो ॥

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो |

भोर भयो गैयन के पाछे,

 मधुवन मोहिं पठायो ।

भोर भयो गैयन के पाछे,

 मधुवन मोहिं पठायो ।

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ॥

हरि नाम का आधार: सूरदास जी की भक्ति के माध्यम से मुक्ति की प्राप्ति

                                                                                                                                                                           Result Plot

॥सूरदास जी की रचना : हरि नाम का महत्व और भक्ति के लाभ ॥

Surdas Poetry: हरि नाम का आधार | Spiritual Bhajan in Kalikal

कलिकाल में हरि नाम का आधार

है हरि नाम कौ आधार।
और इहिं कलिकाल नाहिंन रह्यौ बिधि-ब्यौहार॥

  • अर्थ: सूरदास जी कहते हैं कि इस कलियुग में केवल हरि नाम ही जीवन का वास्तविक सहारा है। संसार के विधि-विधान और व्यवहार अपने सही मार्ग से भटक गए हैं, लेकिन हरि का नाम ही मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
  • उदाहरण:
    जैसे गहरे समुद्र में नाविक अपनी दिशा खो देता है और केवल तारे (सितारे) के सहारे मार्ग ढूंढता है, वैसे ही हरि का नाम हमें संसार के भंवर से पार लगाता है।

नारदादि सुकादि संकर कियौ यहै विचार।
सकल स्रुति दधि मथत पायौ इतौई घृत-सार॥

  • अर्थ: महर्षि नारद, शुकदेव और भगवान शंकर जैसे महान संतों ने भी यही निष्कर्ष निकाला कि समस्त वेदों का सार हरि भक्ति में ही है। जैसे दूध से घी निकालने के लिए उसे मथा जाता है, वैसे ही हरि भजन वेदों का निचोड़ है।
  • उदाहरण:
    यह ठीक वैसा ही है जैसे खेती के बाद अनाज का चयन किया जाता है और उसमें से सर्वोत्तम दाना निकाला जाता है। हरि भजन भी जीवन की सर्वोत्तम उपलब्धि है।SHREE BAL KRISHNA JI KI AARTI IN HINDI

दसहुं दिसि गुन कर्म रोक्यौ मीन कों ज्यों जार।
सूर, हरि कौ भजन करतहिं गयौ मिटि भव-भार॥

  • अर्थ: हरि भजन करते ही दसों दिशाओं के बुरे कर्म और बंधन ऐसे समाप्त हो जाते हैं, जैसे मछली जाल में फंसकर जल से बाहर आ जाती है।
  • उदाहरण:
    यह ठीक वैसे है जैसे सूरज के निकलते ही अंधकार छिप जाता है। हरि का स्मरण करते ही संसार के दुख मिटने लगते हैं।

अब हों नाच्यौ बहुत गोपाल।
काम क्रोध कौ पहिरि चोलना, कंठ विषय की माल॥

अर्थ:
यह पंक्ति सूरदास जी के भक्ति गीत से है, जिसमें वे श्री कृष्ण की भक्ति में पूर्ण रूप से लीन होने की बात करते हैं। “अब हों नाच्यौ बहुत गोपाल” का अर्थ है कि श्री कृष्ण के प्रेम में वह नृत्य करते हुए आनंदित हैं। “काम क्रोध” को चोलना (कपड़ा) और “विषय की माल” को कंठ की माला के रूप में दर्शाते हुए, वे कहते हैं कि यह विकार (इच्छाएं और क्रोध) हमें अपने जीवन में पहनने नहीं चाहिए, क्योंकि ये हमारे भक्ति मार्ग में रुकावट डालते हैं।

उदाहरण:
जैसे कोई व्यक्ति अपनी इच्छाओं और क्रोध में फंसा रहता है, वैसे ही हमें इन विकारों से बचना चाहिए और भगवान की भक्ति में नृत्य की तरह लीन होना चाहिए।

संदेश:
सांसारिक मोह-माया और विकारों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए श्री कृष्ण की भक्ति में समर्पित होना चाहिए।

महामोह के नूपुर बाजत, निन्दा सब्द रसाल।
भरम भरयौ मन भयौ पखावज, चलत कुसंगति चाल॥

अर्थ:
सूरदास जी ने इस पंक्ति में संसारिक मोह और भ्रम को दर्शाया है। “महामोह के नूपुर बाजत” का मतलब है कि जब कोई व्यक्ति मोह के बंधन में फंसा होता है, तो उसकी इच्छाओं और भावनाओं की ध्वनियाँ (नूपुर की तरह) निरंतर बजती रहती हैं। “निन्दा सब्द रसाल” का अर्थ है कि संसारिक मोह और भ्रम के कारण व्यक्ति दूसरों की निंदा और बुरी बातें बोलता है। “भरम भरयौ मन भयौ पखावज” में “भरम” का अर्थ है भ्रम और “पखावज” (ढोल) से यहाँ यह संकेत दिया गया है कि भ्रम के कारण मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा होती है। “चलत कुसंगति चाल” का अर्थ है कि गलत संगति और कुविचार से आदमी के कदम गलत दिशा में चलते हैं।

संदेश:
यह पंक्ति यह शिक्षा देती है कि मोह, भ्रम, निंदा और कुविचार के कारण मनुष्य अपनी सच्ची दिशा से भटक जाता है। इसलिए जीवन में सही संगति और सही विचारों को अपनाना चाहिए, ताकि हम सच्चे मार्ग पर चल सकें और हमारे मन में शांति और सुरक्षितता बनी रहे।

तृसना नाद करति घट अन्तर, नानाविध दै ताल।
माया कौ कटि फैंटा बांध्यो, लोभ तिलक दियो भाल॥

अर्थ:
यह पंक्ति यह बताती है कि मनुष्य की तृष्णाएँ और इच्छाएँ उसे मानसिक अशांति देती हैं, जैसे अंदर कई आवाजें गूंजती रहती हैं। माया (संसारिक मोह) ने उसे अपने जाल में फंसा लिया है और लोभ (लालच) ने उसकी पहचान को प्रभावित कर दिया है।

संदेश:
तृष्णा, माया और लोभ मनुष्य को भटका कर उसे सच्चे मार्ग से दूर करते हैं। इनसे बचकर आत्मशांति की ओर बढ़ना चाहिए।

संसार के भंवर से पार लाने वाला हरि का नाम

कोटिक कला काछि दिखराई, जल थल सुधि नहिं काल।
सूरदास की सबै अविद्या, दूरि करौ नंदलाल॥

अर्थ:
भगवान श्री कृष्ण की असीम लीलाएं और कलाएं सभी स्थानों और समय से परे हैं। सूरदास जी भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनकी सभी अज्ञानता दूर हो जाए और वे भगवान के दिव्य ज्ञान में समाहित हो जाएं।

संदेश:
भगवान की दिव्य लीलाओं और ज्ञान का अनुभव करने के लिए हमें अपनी अविद्या को दूर करना चाहिए।

प्रभु, हौं सब पतितन कौ राजा।
परनिंदा मुख पूरि रह्यौ जग, यह निसान नित बाजा॥

अर्थ:
यह पंक्ति सूरदास जी की प्रार्थना को व्यक्त करती है, जिसमें वे भगवान से कहते हैं कि वे सभी पापियों और पतितों के राजा हैं। उनके मुख से परनिंदा (दूसरों की निंदा) भर गई है, और यह उनके जीवन का प्रतीक बन गया है।

संदेश:
यह पंक्ति आत्म-स्वीकृति और आत्मनिरीक्षण की ओर इशारा करती है। सूरदास जी अपनी कमियों और पापों को स्वीकारते हुए भगवान से अपने अंदर की बुराईयों को दूर करने की प्रार्थना कर रहे हैं।

तृस्ना देसरु सुभट मनोरथ, इंद्रिय खड्ग हमारे।
मंत्री काम कुमत दैबे कों, क्रोध रहत प्रतिहारे॥

अर्थ:
यह पंक्ति बताती है कि तृष्णा और इच्छाएं हमारे मन में बुराई फैलाने वाले सैनिक की तरह काम करती हैं। इंद्रियां हमारे लिए शस्त्र बन जाती हैं, और काम तथा क्रोध हमारे जीवन में बुराई और भ्रम उत्पन्न करते हैं।

संदेश:
हमारी इंद्रियों और भावनाओं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है, क्योंकि तृष्णा, काम और क्रोध जैसे विकार हमें सही मार्ग से भटका सकते हैं।

गज अहंकार चढ्यौ दिगविजयी, लोभ छ्त्र धरि सीस॥
फौज असत संगति की मेरी, ऐसो हौं मैं ईस।

अर्थ:
यह पंक्तियाँ अहंकार और लोभ के प्रभाव को दर्शाती हैं। जैसे हाथी का अहंकार बढ़ता है और वह लोभ में फंसता है, वैसे ही व्यक्ति भी बुरी संगति और गलत भावनाओं से प्रभावित हो जाता है।

संदेश:
अहंकार और लोभ इंसान को सही रास्ते से भटका सकते हैं। हमें इनसे बचने के लिए सतर्क रहना चाहिए।

मोह मदै बंदी गुन गावत, मागध दोष अपार॥
सूर, पाप कौ गढ दृढ़ कीने, मुहकम लाय किंवार॥

अर्थ:
मोह और मद (अहंकार) व्यक्ति को बंदी बना लेते हैं और उसके गुणों को भी झूठा बना देते हैं। सूरदास जी कहते हैं कि पाप के कड़े गढ़ को सुदृढ़ किया है और इससे व्यक्ति का मन बुराईयों से भर जाता है।

संदेश:
मोह और अहंकार इंसान को पाप और गलत मार्ग पर ले जाते हैं, जिससे वह अपनी वास्तविकता को खो बैठता है।

अब कै माधव, मोहिं उधारि।
मगन हौं भव अम्बुनिधि में, कृपासिन्धु मुरारि॥

अर्थ:
यह पंक्तियाँ सूरदास जी की भक्ति को दर्शाती हैं, जहां वे भगवान श्री कृष्ण से अपनी मुक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। सूरदास जी कहते हैं कि अब, हे माधव (कृष्ण), मुझे इस संसार के दुखों से उबारो, क्योंकि मैं इस भवसागर में फंसा हुआ हूं। आप ही मेरे लिए कृपा के समुद्र हो, मुझे आपकी कृपा से मोक्ष प्राप्त हो।

संदेश:
सच्चे भक्त के दिल में भगवान की कृपा की आवश्यकता होती है ताकि वह संसार के मोह और दुखों से मुक्त हो सके।

हरि नाम से मुक्ति प्राप्ति की प्रक्रिया

नीर अति गंभीर माया, लोभ लहरि तरंग।
लियें जात अगाध जल में गहे ग्राह अनंग॥

अर्थ:
यह पंक्तियाँ माया के प्रभाव को व्यक्त करती हैं। सूरदास जी कहते हैं कि माया एक गहरी और अथाह जल की तरह है, जिसमें लोभ की लहरें उठती हैं। जब व्यक्ति इस गहरे जल में फंसता है, तो वह मोह और लोभ के जाल में पकड़ा जाता है, जैसे अनंग (अप्राकृतिक आकर्षण) द्वारा व्यक्ति को पकड़ लिया जाता है।

संदेश:
माया और लोभ का प्रभाव बहुत गहरा होता है, और व्यक्ति जब इनसे प्रभावित होता है तो वह अंधकार में फंस जाता है।

मीन इन्द्रिय अतिहि काटति, मोट अघ सिर भार।
पग न इत उत धरन पावत, उरझि मोह सिबार

अर्थ:
जैसे मछली अपने इन्द्रिय को पकड़ने के कारण निरंतर संघर्ष करती है, वैसे ही हमारी इन्द्रियाँ हमें पाप और मोह में फंसा देती हैं। मनुष्य अपने पथ पर सही कदम नहीं रख पाता, क्योंकि वह मोह के जाल में उलझ जाता है।

संदेश:
यह शेर इन्द्रियों के वशीभूत होने से होने वाले मानसिक उलझन और मोह के प्रभाव को दर्शाता है, जो व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने से रोकता है।

काम क्रोध समेत तृष्ना, पवन अति झकझोर।
नाहिं चितवत देत तियसुत नाम-नौका ओर॥

अर्थ:
काम, क्रोध और तृष्णा के तूफान में मन बहुत विचलित है, जैसे तेज़ हवा द्वारा झकझोरा जा रहा हो। लेकिन ध्यान नहीं केंद्रित हो पा रहा है और वह नाम-नौका (कृष्ण का नाम) का सहारा नहीं ले पा रहा है।

संदेश:
यह शेर व्यक्ति के भीतर के विकारों (काम, क्रोध, तृष्णा) के प्रभाव को दर्शाता है, जो मन को परेशान करते हैं और भगवान के नाम का स्मरण करने में रुकावट डालते हैं।

थक्यौ बीच बेहाल बिह्वल, सुनहु करुनामूल।
स्याम, भुज गहि काढ़ि डारहु, सूर ब्रज के कूल॥

अर्थ:
मैं बीच मार्ग में थक कर बेहाल हो गया हूँ। कृपया सुनो, करुणा के स्रोत स्याम (कृष्ण)! तुम मेरी बाहों को पकड़कर मुझे उद्धार करो और ब्रज के किनारे पर ले आओ।

संदेश:
यह शेर भगवान श्री कृष्ण से मदद की प्रार्थना है, जिसमें भक्त अपने दुखों और संघर्षों से राहत पाने के लिए भगवान की शरण में आता है।

SHREE RAM PRABHU KI STUTI IN HINDI

कब तुम मोसो पतित उधारो।
पतितनि में विख्यात पतित हौं पावन नाम तिहारो

अर्थ:
हे भगवान, कब तुम मुझे, जो पतितों में सबसे बड़ा पतित हूँ, उधार (बचाओ) करोगे? मैं तो वही व्यक्ति हूँ, जो पापों से लिप्त है, लेकिन तुम अपने पवित्र नाम से मुझे उद्धार दो।

संदेश:
यह शेर भगवान से क्षमा और उद्धार की प्रार्थना है। यह दिखाता है कि पापी व्यक्ति भी भगवान के नाम से शुद्ध हो सकता है।

बड़े पतित पासंगहु नाहीं, अजमिल कौन बिचारो।
भाजै नरक नाम सुनि मेरो, जमनि दियो हठि तारो॥

अर्थ:
जो बहुत बड़े पापी होते हैं, उनके पास भी कोई बचाव नहीं होता। अजमिल जैसे पापी के बारे में सोचें, जिन्होंने नरक में जाने के बावजूद भगवान का नाम लिया और यमराज से बच गए। सूरदास कहते हैं कि, पापी भी भगवान के नाम से मुक्ति पा सकते हैं।

संदेश:
यह शेर बताता है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी बड़ा पापी क्यों न हो, भगवान के नाम से अपना उद्धार कर सकता है।

छुद्र पतित तुम तारि रमापति, जिय जु करौ जनि गारो।
सूर, पतित कों ठौर कहूं नहिं, है हरि नाम सहारो॥

अर्थ:
हे राम के पतिके, तुम सबको उबारने वाले हो, चाहे वह कितने भी छोटे या पापी क्यों न हों। सूरदास कहते हैं कि, पापियों के लिए कोई ठिकाना नहीं है, परंतु भगवान का नाम ही उनका सहारा है।

संदेश:
यह शेर भगवान की कृपा और उनके नाम की महिमा को दर्शाता है। भगवान का नाम पापियों को भी उबारने में सक्षम है, और यही उनका सर्वोत्तम सहारा है।

जसोदा हरि पालनै झुलावै।

हलरावै दुलरावै मल्हावै जोई सोई कछु गावै।।

अर्थ:
माँ यशोदा भगवान श्री कृष्ण को पालती हैं, उन्हें झुलाती हैं, दुलार करती हैं और उन्हें शरारतें दिखाती हैं। जो कुछ भी वह करती हैं, वह भगवान की लीलाओं का एक रूप होता है।

संदेश:
यह शेर माँ यशोदा की कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और उनके प्रति ममता को दर्शाता है। भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की सुंदरता और दिव्यता का प्रतीक है।

मेरे लाल को आउ निंदरिया काहें न आनि सुवावै।

तू काहै नहिं बेगहिं आवै तोकौं कान्ह बुलावै।।

अर्थ:
माँ यशोदा भगवान श्री कृष्ण से कह रही हैं कि मेरे लाल, तू क्यों नहीं सोता? यदि तू सोने में न आ रहा है तो कृष्ण को बुलाने से वो तुझे सोने का सुख देंगे।

संदेश:
यह शेर माँ यशोदा की ममता और भगवान श्री कृष्ण की लीला को दर्शाता है, जिसमें माँ अपने लाल को शांति और सुकून की प्राप्ति के लिए कृष्ण की दिव्य शक्ति को याद करती हैं।

कबहुं पलक हरि मुंदी लेत हैं कबहुं अधर फरकावै।

सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि करि करि सैन बतावै।I

अर्थ:
कभी भगवान श्री कृष्ण अपनी पलकें बंद कर लेते हैं, कभी अपने अधरों को हलका सा हिलाते हैं। वे सोते समय भी मौन रहते हुए अपनी लीलाओं का संकेत करते हैं और अपनी भक्ति का अनुभव कराने के लिए चुपके से अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास कराते हैं।

संदेश:
यह शेर भगवान की अदा और लीला की गहराई को दर्शाता है, जहां वे अपनी साधारणता में भी अद्वितीय और दिव्य होते हैं।

इहि अंतर अकुलाइ उठे हरी जसुमति मधुरै गावै।

जो सुख सुर अमर मुनि दुरलभ सो नंद भामिनी पावै।।

अर्थ:
माता यशोदा के ह्रदय में कृष्ण के प्रति अपार प्रेम जाग्रत होता है, और उनके प्रेम में अत्यधिक उल्लास और आनंद है। यह आनंद इतना विशिष्ट और दुर्लभ है कि वह सुख, जो देवताओं, मुनियों और अमरों के लिए भी कठिन है, वह नंदनी (यशोदा) को प्राप्त हुआ है।

संदेश:
यह शेर भगवान श्री कृष्ण के प्रति माता यशोदा के अत्यधिक प्रेम और समर्पण को दर्शाता है, जो उन सुखों और आनंदों से भी अधिक है, जिनका अनुभव देवता और साधक नहीं कर पाते।

मैं नहीं माखन खायो मैया। मैं नहीं माखन खायो।

ख्याल परै ये सखा सबै मिली मेरैं मुख लपटायो।।

अर्थ:
कृष्णा माता यशोदा से कहते हैं, “मैया, मैंने माखन नहीं खाया है।” लेकिन उनके मित्र (सखा) उन्हें ललचाकर कहते हैं कि कृष्ण के मुँह में माखन लगा हुआ है, इसलिए वह झूठ बोल रहे हैं। कृष्ण अपनी मासूमियत और शरारतों से माता का दिल जीतने की कोशिश करते हैं।

संदेश:
यह शेर कृष्ण की मासूमियत और प्रेम को दर्शाता है, जिसमें वह अपनी शरारतों से माता का दिल मोहित करते हैं और ईश्वर के भक्तों के प्रति उनकी स्नेहभावना व्यक्त करते हैं।

देखि तुही छींके पर भजन ऊँचे धरी लटकायो।

हौं जु कहत नान्हें कर अपने मैं कैसे करि पायो।।

अर्थ:
सूरदास जी कहते हैं कि जब यशोदा माता ने देखा कि कृष्ण ने माखन की चोरी की है और वह माखन मुँह में लेकर छींके पर चढ़ कर भजन गा रहे हैं, तो यशोदा माता ने उन्हें डांटा। वह सोच रही थीं कि भगवान की लीला कैसी अजीब है, वे छोटे बच्चे होकर भी इतने नटखट हैं।

संदेश:
ईश्वर की लीला अनंत और अप्रतिम होती है। उनकी मासूमियत और क्रीतियों में दिव्यता होती है, जो हमें जीवन में सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाती है।

मुख दधि पोंछी बुध्दि एक किन्हीं दोना पीठी दुरायो।

डारी सांटी मुसुकाइ जशोदा स्यामहिं कंठ लगायो।।

अर्थ:
सूरदास जी कहते हैं कि श्री कृष्ण ने माखन खाया, मुंह में दूध लगा लिया था। जब यशोदा ने उनका मुंह साफ किया, तो कृष्ण ने मुस्कुराते हुए अपनी मां को गले लगा लिया। उनका प्यार और मासूमियत देखकर यशोदा प्रसन्न हो गईं।

संदेश:
भगवान की मासूमियत और सरलता ही उनकी दिव्यता का सबसे प्यारा रूप है, जो हर दिल को छू जाता है।

बाल बिनोद मोद मन मोह्यो भक्ति प्राप दिखायो।

सूरदास जसुमति को यह सुख सिव बिरंचि नहिं पायो।।

अर्थ:
सूरदास जी कहते हैं कि श्री कृष्ण का बाल रूप देखकर उनकी माया में बसा मन परम आनंदित होता है और भक्ति प्राप्त करने का वास्तविक सुख देखने को मिलता है। यह सुख भगवान शिव और ब्रह्मा जी को भी प्राप्त नहीं हुआ है, जो नंदनी यशोदा को मिला।

संदेश:
भगवान के बाल रूप की भक्ति और उनकी सरलता में अपार सुख छिपा है, जिसे कोई और नहीं पा सकता।

है हरि नाम कौ आधार।
और इहिं कलिकाल नाहिंन रह्यौ बिधि-ब्यौहार॥

अर्थ:
सूरदास जी कहते हैं कि इस कलिकाल में केवल हरि का नाम ही जीवन का असली आधार है, और इस समय कोई भी अन्य उपाय विधि या धर्म के अनुसार फलदायी नहीं है।

संदेश:
हरि के नाम का जप ही इस कलिकाल में सबसे प्रभावी और जीवन को उद्धार देने वाला साधन है।

नारदादि सुकादि संकर कियौ यहै विचार।
सकल स्रुति दधि मथत पायौ इतौई घृत-सार॥

अर्थ:
सूरदास जी कहते हैं कि नारद, सुकदेव, शंकर आदि महापुरुषों ने यही विचार किया और सभी वेदों को अच्छे से समझा। जैसे दही को मथकर घी निकाला जाता है, वैसे ही वेदों में से भगवान के श्रेष्ठतम ज्ञान (घृत) को प्राप्त किया।

संदेश:
भगवान का सच्चा ज्ञान वेदों से प्राप्त होता है, और यह ज्ञान आत्मा की शुद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दसहुं दिसि गुन कर्म रोक्यौ मीन कों ज्यों जार।
सूर, हरि कौ भजन करतहिं गयौ मिटि भव-भार॥

अर्थ:
सूरदास जी कहते हैं कि जैसे मछली को जल में जाल से फंसाया जाता है और वह जाल में उलझ जाती है, वैसे ही व्यक्ति संसार के बंधनों में फंस जाता है। लेकिन जब वह भगवान के भजन में रत होता है, तो उसकी सारी कष्‍ट मिट जाते हैं और वह संसार के बंधनों से मुक्त हो जाता है।

संदेश:
भगवान के भजन और ध्यान से ही संसार के बंधनों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति का जीवन सहज एवं शुद्ध हो जाता है।

 

ICC Men’s T20 World Cup 2024 Schedule (IST)

ICC Men’s T20 World Cup 2024 Schedule (IST)

आईसीसी ने जून 2024 में खेले जाने वाले टी20 क्रिकेट वर्ल्ड का टाइम टेबल घोषित कर दिया है। टूर्नामेंट में 20 टीमें हिस्सा लेंगी और ट्रॉफी जीतने की कोशिश करेंगी। सभी टीमों को 4 ग्रुप में बांटा गया है.

Group A Group B Group C Group D
INDIA

Canada

Pakistan

USA

Ireland

Australia

England

Namibia

Oman

Scotland

Afghanistan

New Zeeland

PNG

Uganda

West indies

Bangladesh

Nepal

Netherland

Srilanka

South Africa

How to make a Team in Cricket : Suggestion

यह टूर्नामेंट 1 जून, 2024 से शुरू होगा। भारत 5 जून, 2024 को अपनी यात्रा शुरू करेगा और आयरलैंड से भिड़ेगा। यह मैच न्यूयॉर्क मैदान पर खेला जाएगा। फाइनल 29 जून 2024 को होगा। Time table यहां दिया गया है :-

Match No. Date & Time IST Match Venue
1 Sat, 1 June, 6:00 AM USA v CANADA Dallas
2 Sun, 2 June, 8:00 PM WEST INDIES v PNG Guyana
3 Sun, 2 June,6:00 AM NAMIBIA v OMAN Barbados
4 Mon, 3 June, 8:00 PM SL v SA New York
5 Mon, 3 June, 6:00 AM AFG v UGANDA Guyana
6 Tue, 4 June, 8:00 PM ENG v SCO Barbados
7 Tue, 4 June, 9:00 PM NETH v NEPAL Dallas
8 Wed, 5 June,8:00 PM INDIA v IRE New York
9 Wed, 5 June,5:00 AM PNG v UGANDA Guyana
10 Wed, 5 June,6:00 AM AUS v OMAN Barbados
11 Thu, 6 June, 6:00AM USA v PAK Dallas
12 Thu, 6 June, 12:30 AM NAMIBIA v SCO Barbados
13 Fri, 7 June, 8:00 PM CANADA v IRE New York
14 Fri, 7 June, 5:00 AM NEW ZEALAND v AFG Guyana
15 Fri, 7 June, 6:00 AM SRI LANKA v BNG Dallas
16 Sat, 8 June,8:00 PM NETH v SA New York
17 Sat, 8 June,10:30 AM AUS v ENG Barbados
18 Sat, 8 June, 6:00 AM WEST INDIES v UGANDA Guyana
19 Sun, 9 June, 8:00 PM INDIA v PAK New York
20 Sun, 9 June, 10:30 AM OMAN v SCO Antigua
21 Mon, 10 June,8:00PM SA v BNG New York
22 Tue, 11 June,8:00PM PAK v CANADA New York
23 Tue, 11 June. 5:00 AM SRI LANKA v NEPAL Florida
24 Tue, 11 June,6:00AM AUS v NAMIBIA Antigua
25 Wed, 12 June,8:00 PM USA v INDIA New York
26 Wed, 12 June,6:00 AM WEST INDIES v NEW ZEALAND Trinidad
27 Thu, 13 June,8:00 PM ENG v OMAN Antigua
28 Thu, 13 June,12:30 AM BNG v NETH St. Vincent
29 Thu, 13 June, 6:00 AM AFG v PNG Trinidad
30 Fri, 14 June,8:00 PM USA v IRE Florida
31 Fri, 14 June,5:00 AM SA v NEPAL St. Vincent
32 Fri, 14 June,6:00 AM NEW ZEALAND v UGANDA Trinidad
33 Sat, 15 June,8:00 PM INDIA v CANADA Florida
34 Sat, 15 June,10:30 AM NAMIBIA v ENG Antigua
35 Sat, 15 June,6:00 AM AUS v SCO St. Lucia
36 Sun, 16 June,8:00 PM PAK v IRE Florida
37 Sun, 16 June,5:00 AM BNG v NEPAL St. Vincent
38 Sun, 16 June,6:00AM SRI LANKA v NETH St. Lucia
39 Mon, 17 June,8:00 PM NEW ZEALAND v PNG Trinidad
40 Mon, 17 June,6:00 AM WEST INDIES v AFG St. Lucia
18-Jun Holiday
41 Wed, 19 June,8:00 PM A2 v D1 Antigua
42 Wed, 19 June,6:00 PM B1 v C2 St. Lucia
43 Thu, 20 June, 8:00 PM C1 v A1 Barbados
44 Thu, 20 June, 6:00 AM B2 v D2 Antigua
45 Fri, 21 June, 8:00 PM B1 v D1 St. Lucia
46 Fri, 21 June,6:00 AM A2 v C2 Barbados
47 Sat, 22 June, 8:00 PM A1 v D2 Antigua
48 Sat, 22 June, 6:00 AM C1 v B2 St. Vincent
49 Sun, 23 June, 8:00 PM A2 v B1 Barbados
50 Sun, 23 June,6:00 AM C2 v D1 Antigua
51 Mon, 24 June,8:00 PM B2 v A1 St. Lucia
52 Mon, 24 June,6:00 AM C1 v D2 St. Vincent
25-Jun Holiday
53 Wed, 26 June,6:00 AM Semi 1 Guyana
54 Thu, 27 June,8 PM Semi 2 Trinidad
55 Sat, 29 June Final Barbados
56 Sun, 30 June Reserve Day

 

 

 

How to make a Team in Cricket : Suggestion

India Vs Australia

क्रिकेट में Fantasy टीम कैसे बनाएं – एक सुझाव आधारित पोस्ट

How to make a Team in Cricket : Suggestion-

 आजकल हम कई ऐसे प्लेटफॉर्म देख रहे हैं जो लोगों को अपनी टीमों के साथ खेलों में भाग लेने का स्थान प्रदान करते हैं. कुछ चुने हुए सदस्य जीतते हैं और अन्य नहीं जीत पाते. कई वेबसाइटें सुझाव देती हैं, लेकिन खेल उस समय के हालात और परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

ICC world cup 2023 | Teams announcement for ICC 50 over cricket world cup 2023

How to make a Team on Dream11, My11Circle etc

Cricket Team

आप चाहे कितने भी बेहतरीन खिलाड़ियों को चुनें, अगर आप पिच का व्यवहार, मौसम की रिपोर्ट, टॉस आदि देखना भूल जाते हैं, तो आप मौका खो देते हैं. फैंटेसी लीग आपके खेल ज्ञान कौशल के बारे में है, लेकिन इसमें थोड़े से भाग्य की भी जरूरत होती है. यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जिनका पालन करने से आपको एक अच्छी टीम बनाने में मदद मिल सकती है.

India vs Australia 3 match Odi Series 2023

अपनी टीम बनाने के लिए सुझाव:

  • बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में खिलाड़ियों के हालिया प्रदर्शन पर विचार करें।
  • पिच रिपोर्ट देखें – कुछ पिचें बल्लेबाजों के लिए अनुकूल होती हैं, जबकि अन्य गेंदबाजों के लिए।
  • अपनी टीम को बल्लेबाजों, गेंदबाजों, ऑलराउंडरों और एक विकेटकीपर के मिश्रण के साथ संतुलित करें।
  • क्रेडिट Limit की जांच करें और अपने बजट में फिट इन-फॉर्म खिलाड़ियों को शामिल करने का प्रयास करें।
  • याद रखें, फैंटेसी क्रिकेट में थोड़ा भाग्य भी शामिल होता है, इसलिए अपने शोध और अंतर्ज्ञान के आधार पर अपनी टीम को अंतिम रूप दें।

 

Types of Cholesterol – HDL, LDL, and Triglycerides

Types of Cholesterol – HDL, LDL, and Triglycerides

टीजीएल, एलडीएल और एचडीएल (TGL, LDL and HDL)

टीजीएल (TG (Triglycerides)उच्च ट्राइग्लिसराइड्स मेटाबोलिक सिंड्रोम नामक एक अपरिहार्य स्थिति का हिस्सा हो सकता है। यह अन्य बीमारी का कारण बन सकता है:

High TG can be part of metabolic syndrome, which is an unavoidable condition. It can cause other diseases:

    • कमएचडीएल – Low HDL (good cholesterol)
    • उच्चरक्तचाप -High blood pressure
    • पेटकीचर्बी- Abdominal fat
    • उच्च मधुमेह-High diabetes
    • मेटाबोलिकसिंड्रोमसेहृदयरोग, स्ट्रोकऔरमधुमेहविकसितहोनेकीसंभावनाबहुतबढ़जातीहै। – Metabolic syndrome greatly increases the chances of developing heart disease, stroke, and diabetes.

ट्राइग्लिसराइड्स वसा कोशिकाओं में जमा होते हैं। बाद में, हार्मोन भोजन के बीच ऊर्जा के लिए ट्राइग्लिसराइड्स छोड़ते हैं। यदि आप नियमित रूप से अधिक कैलोरी खाते हैं, खासकर उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ तो आपको सावधान रहने की जरूरत है

Triglycerides are stored in fat cells. Hormones release triglycerides for energy between meals. If you regularly eat too many calories, especially foods high in carbohydrates, you need to be careful.

 

एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल LDL (Bad) Cholesterol

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को “खराब” कोलेस्ट्रॉल माना जाता है, क्योंकि यह धमनियों में वसा के निर्माण में योगदान देता है। इससे धमनियां सिकुड़ जाती हैं और दिल का दौरा, स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

LDL cholesterol is considered “bad” cholesterol because it contributes to the buildup of fat in the arteries. This causes the arteries to narrow and increases the risk of heart attack and stroke.

एचडीएल (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल HDL (Good) Cholesterol

एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल माना जा सकता है क्योंकि एक स्वस्थ स्तर दिल के दौरे और स्ट्रोक से बचा सकता है। एचडीएल एलडीएल खराब कोलेस्ट्रॉल को धमनियों से दूर ले जाता है और वापस यकृत में ले जाता है, जहां एलडीएल छोटे-छोटे टुकड़ों में टुट जाता है और शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन एचडीएल कोलेस्ट्रॉल एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को पूरी तरह खत्म नहीं करता है। रक्त कोलेस्ट्रॉल का केवल एक-तिहाई से एक-चौथाई हिस्सा एचडीएल द्वारा खत्म किया जाता है।

HDL cholesterol can be considered “good” cholesterol because a healthy level can protect against heart attack and stroke. HDL carries LDL (bad) cholesterol away from the arteries and back to the liver, where LDL is broken down into smaller pieces and excreted from the body. HDL cholesterol does not completely eliminate LDL cholesterol. Only about one-third to one-quarter of blood cholesterol is eliminated by HDL.

HDL

टीजीएल लेवल कितना होना चाहिए

  • Borderline: 150 – 199,
  • High:200-499,
  • Very High>=500
  • Undesirable/high risk

एलडीएल लेवल कितना होना चाहिए

  • Borderline high : 130 -159
  • High : 160 – 189
  • Very high : >=190

एचडीएल लेवल कितना होना चाहिए

  • Borderline high <=40mg/dL
  • Desirable/low risk>=60mg/dl
  • Desirable: <100
  • Above desirable: 100 – 129

It is important to talk to your doctor about your triglyceride and LDL cholesterol levels. They can help you determine if you are at risk for heart disease or stroke and recommend lifestyle changes or medication to help you lower your risk.

 

भगवदगीता के 8 सबसे लोकप्रिय श्लोक

                                                                                                                                                                           Result Plot

भगवदगीता के 8 सबसे लोकप्रिय श्लोक

श्री यशोदा का परम दुलारा,बाबा के अँखियन का तारा ।
गोपियन के प्राणन से प्यारा,इन पर प्राण न्योछावर कीजै ॥

बलदाऊ के छोटे भैया,कनुआ कहि कहि बोले मैया ।
परम मुदित मन लेत बलैया,अपना सरबस इनको दीजै ॥

 

  • यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:
    अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

अर्थ:-

हे भारत, जब-जब धर्म का लोप होता है और अधर्म में वृद्धि होती है, तब-तब मैं धर्म के अभ्युत्थान के लिए स्वयम् की रचना करता हूं अर्थात अवतार लेता हूं।

  • नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक:
    चैनं क्लेदयन्त्यापो शोषयति मारुत:

अर्थ: –

आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा उसे सुखा सकती है।

  • हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।
    तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:
    अर्थ: –

हे कौन्तेय यदि तुम युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते हो तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी होते हो तो धरती का सुख को भोगोगे,इसलिए उठो, हे कौन्तेय , और निश्चय करके युद्ध करो।

  • कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन:।
    मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
    अर्थ:-
    कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फल में नही है। इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही कर्म करने में तुम्हारी आसक्ति हो।
  • परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय दुष्कृताम्।
    धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगेयुगे॥

अर्थ: –

सज्जन पुरुषों के कल्याण के लिए , दुष्कर्मियों के विनाश के लिए और धर्म की स्थापना के लिए मैं युगों-युगों में जन्म लेता आया हूं।

 

  • क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:
    स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
    अर्थ:-
    क्रोध से मनुष्य की मति मारी जाती है इससे स्मृति भ्रमित हो जाती है। स्मृति-भ्रम हो जाने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद अपना ही का नाश कर बैठता है।

 

  • सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज:।

           अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:॥

अर्थ:-

हे अर्जुन सभी धर्मों को त्याग कर अर्थात हर आश्रय को त्याग कर केवल मेरी शरण में आओ, मैं  तुम्हें सभी पापों से मुक्ति दिला दूंगा, इसलिए शोक मत करो।

  • ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
    सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
    अर्थ: –

विषयों  के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है।

 

श्री यशोदा का परम दुलारा,बाबा के अँखियन का तारा ।
गोपियन के प्राणन से प्यारा,इन पर प्राण न्योछावर कीजै ॥

बलदाऊ के छोटे भैया,कनुआ कहि कहि बोले मैया ।
परम मुदित मन लेत बलैया,अपना सरबस इनको दीजै ॥

 

श्री राम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद

                                                                                                                                                                           Result Plot

॥श्री राम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद॥

चौपाई :

खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं॥
तेहिं अवसर सुनि सिवधनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥

देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने॥
गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा॥
सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिस बस कछुक अरुन होइ आवा॥
भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते॥

बृषभ कंध उर बाहु बिसाला। चारु जनेउ माल मृगछाला॥
कटि मुनिबसन तून दुइ बाँधें। धनु सर कर कुठारु कल काँधें॥

दोहा :

सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरूप।
धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप॥

चौपाई :

देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला॥
पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा॥

जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी॥
जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा॥

आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गईं सयानीं॥
बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई॥

रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा॥
रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन॥

दोहा :

बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।
पूँछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर॥

चौपाई :

समाचार कहि जनक सुनाए। जेहि कारन महीप सब आए॥
सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे॥

अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥
बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू॥

अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥

मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी॥
भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता॥

दोहा :

सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु।
हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोलेरघुबीरु॥

चौपाई :

सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई॥
सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥

सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥
सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने॥

बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥

दोहा :

रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥

चौपाई :

लखन कहा हँसि हमरें जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना॥
का छति लाभु जून धनु तोरें। देखा राम नयन के भोरें॥

छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू॥
बोले चितइ परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा॥

बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही॥
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्व बिदित छत्रियकुल द्रोही॥

भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही॥
सहसबाहु भुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा॥

दोहा :

मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर॥

चौपाई :

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी॥
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥

इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥

भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी॥
सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई॥

बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहूँ पा परिअ तुम्हारें॥
कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा॥

दोहा :

जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।
सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गभीर॥

चौपाई :

कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिल कालबस निज कुल घालकु॥
भानु बंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू॥

काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं॥
तुम्ह हटकहु जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा॥

लखन कहेउ मुनि सुजसु तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा॥
अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी॥

नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू॥
बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा॥

दोहा :

 सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु॥

चौपाई :

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा॥
सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा॥

अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालकु बधजोगू॥
बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब यहु मरनिहार भा साँचा॥

कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू॥
खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगें अपराधी गुरुद्रोही॥

उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें॥

न त एहि काटि कुठार कठोरें। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें॥

दोहा :

गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।

अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ॥

चौपाई :

कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहिं जान बिदित संसारा॥

माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें॥

सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा॥

अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली॥

सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा॥

भृगुबर परसु देखावहु मोही। बिप्र बिचारि बचउँ नृपदोही॥

मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बा़ढ़े॥

अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे॥

दोहा :

लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।

बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु॥

चौपाई :

नाथ करहु बालक पर छोहु। सूध दूधमुख करिअ न कोहू॥

जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना॥

जौं लरिका कछु अचगरि करहीं। गुर पितु मातु मोद मन भरहीं॥

करिअ कृपा सिसु सेवक जानी। तुम्ह सम सील धीर मुनि ग्यानी॥

राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने। कहि कछु लखनु बहुरि मुसुकाने॥

हँसत देखि नख सिख रिस ब्यापी। राम तोर भ्राता बड़ पापी॥

गौर सरीर स्याम मन माहीं। कालकूट मुख पयमुख नाहीं॥

सहज टेढ़ अनुहरइ न तोही। नीचु मीचु सम देख न मोही॥

दोहा :

लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।

जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल॥

चौपाई :

मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया॥

टूट चाप नहिं जुरिहि रिसाने। बैठिअ होइहिं पाय पिराने॥

जौं अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई॥

बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं। मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं॥

थर थर काँपहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी॥

भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी। रिस तन जरइ होई बल हानी॥

बोले रामहि देइ निहोरा। बचउँ बिचारि बंधु लघु तोरा॥

मनु मलीन तनु सुंदर कैसें। बिष रस भरा कनक घटु जैसें॥

दोहा :

सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।

गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम॥

चौपाई :

अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी॥

सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना॥

बररै बालकु एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ ॥

तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी मैं नाथ तुम्हारा॥

कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाईं॥

कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई॥

कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें॥

एहि कें कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं कहा कोपु करि कीन्हा॥

दोहा :

गर्भ स्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।

परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर॥

चौपाई :

बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती॥

भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ। मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ॥

आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्रि बिहसि सिरु नावा॥

बाउ कृपा मूरति अनुकूला। बोलत बचन झरत जनु फूला॥

जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता॥

देखु जनक हठि बालकु एहू। कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू॥

बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा। देखत छोट खोट नृपु ढोटा॥

बिहसे लखनु कहा मन माहीं। मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं॥

दोहा :

परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।

संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु॥2

चौपाई :

बंधु कहइ कटु संमत तोरें। तू छल बिनय करसि कर जोरें॥

करु परितोषु मोर संग्रामा। नाहिं त छाड़ कहाउब रामा॥

छलु तजि करहि समरु सिवद्रोही। बंधु सहित न त मारउँ तोही॥

भृगुपति बकहिं कुठार उठाएँ। मन मुसुकाहिं रामु सिर नाएँ॥

गुनह लखन कर हम पर रोषू। कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू॥

टेढ़ जानि सब बंदइ काहू। बक्र चंद्रमहि ग्रसइ न राहू॥

राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा। कर कुठारु आगें यह सीसा॥

जेहिं रिस जाइ करिअ सोइ स्वामी। मोहि जानिअ आपन अनुगामी॥

दोहा :

प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।

बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु॥

चौपाई :

देखि कुठार बान धनु धारी। भै लरिकहि रिस बीरु बिचारी॥

नामु जान पै तुम्हहि न चीन्हा। बंस सुभायँ उतरु तेहिं दीन्हा॥

जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं॥

छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी॥

हमहि तुम्हहि सरिबरि कसि नाथा। कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा॥

राम मात्र लघुनाम हमारा। परसु सहित बड़ नाम तोहारा॥

देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें॥

सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे॥

दोहा :

बार बार मुनि बिप्रबर कहा राम सन राम।

बोले भृगुपति सरुष हसि तहूँ बंधू सम बाम॥

निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही॥

चाप सुवा सर आहुति जानू। कोपु मोर अति घोर कृसानू॥

समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई॥

मैं एहिं परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे॥

मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें॥

भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा॥

राम कहा मुनि कहहु बिचारी। रिस अति बड़ि लघु चूक हमारी॥

छुअतहिं टूट पिनाक पुराना। मैं केहि हेतु करौं अभिमाना॥

दोहा :

जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।

तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ॥

चौपाई :

देव दनुज भूपति भट नाना। समबल अधिक होउ बलवाना॥

जौं रन हमहि पचारै कोऊ। लरहिं सुखेन कालु किन होऊ ॥

छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना॥

कहउँ सुभाउ न कुलहि प्रसंसी। कालहु डरहिं न रन रघुबंसी॥

बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई॥

सुनि मृदु गूढ़ बचन रघुपत के। उघरे पटल परसुधर मति के॥

राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू॥

देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ॥

दोहा :

जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।

जोरि पानि बोले बचन हृदयँ न प्रेमु अमात॥

चौपाई :

जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानू॥

जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी॥

बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर॥

सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा॥

करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा॥

अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता॥

कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू॥

अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने॥

 

 

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी -श्रीराम स्तुति:

                                                                                                                                                                           Result Plot

॥भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी – श्रीराम स्तुति:

।।जय श्रीराम।।

जब श्री राम जी का प्राकट्य हुआ और माता कौशल्या ने उन्हें चतुर्भुज रूप में देखा तो वो आनंद से भर गई।गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं कि श्री राम जी का रूप देखकर माता कौशल्या उनकी स्तुति करती हैं और कहती है कि आपका जो रूप मेरे हृदय में बस जाए वो बाल रूप धारण करे। आपने मुझे दर्शन देकर मेरे जन्मो की तपस्या को सफल किया है । हे प्रभु ये रूप त्यागकर बाल रूप में आइए और बाल लीला कीजिए।माता कौशल्या का श्री राम जी से संवाद नीचे वर्णित है ।

 

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी ।

हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ॥

लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी ।

भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी ॥

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता ।

माया गुअन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता ॥

करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता ।

सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रकट श्रीकंता ॥

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै ।

मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै ॥

उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।

कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा ।

कीजे सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ॥

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा ।

यह चरित जे गावहि हरिपद पावहि ते न परहिं भवकूपा ॥

     बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार ।

     निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ॥