॥देवी माँ के शक्तिपीठ॥
देवी माँ के शक्तिपीठ वे पवित्र स्थान हैं जहाँ देवी सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे थे। इन स्थानों को बहुत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। प्रमुख रूप से 51 शक्तिपीठ माने जाते हैं, हालांकि कुछ मान्यताओं के अनुसार इनकी संख्या 52 या 108 भी है।
51 शक्तिपीठों का महत्व
इन शक्तिपीठों का निर्माण तब हुआ जब भगवान शिव ने देवी सती के शरीर को लेकर तांडव करना शुरू किया था। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए ताकि शिव का क्रोध शांत हो सके। ये टुकड़े जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। हर शक्तिपीठ में देवी के एक रूप की पूजा होती है और उनके साथ भैरव (शिव का एक रूप) भी पूजे जाते हैं।
51 शक्तिपीठों की सूची और उनकी जानकारी
- किरीट शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी सती का किरीट (मुकुट) गिरा था। देवी का नाम विमला है।
- कात्यायनी शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: मथुरा के पास भूतेश्वर में, देवी का केश-गुच्छ (बालों का गुच्छा) गिरा था। देवी का नाम उमा है।
- करवीर शक्तिपीठ, महाराष्ट्र: यहाँ देवी का त्रिनेत्र (तीसरा नेत्र) गिरा था। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
- श्री पर्वत शक्तिपीठ, जम्मू और कश्मीर: यहाँ देवी का कंठ (गला) गिरा था। देवी का नाम श्रीमती है।
- विशालाक्षी शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर देवी का कुंडल (कान का आभूषण) गिरा था। देवी का नाम विशालाक्षी है।
- गंडकी शक्तिपीठ, नेपाल: यहाँ देवी का दक्षिण (दाहिना) गंड (गाल) गिरा था। देवी का नाम मुक्तिनाथी है।
- बहुला शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी का बाहु (हाथ) गिरा था। देवी का नाम बहुला है।
- मंगल चंडिका शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की अंगुलि (अंगुली) गिरी थी। देवी का नाम सर्वमंगला है।
- उजांनी शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की कलाई गिरी थी। देवी का नाम भ्रामरी है।
- त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ, त्रिपुरा: यहाँ देवी का दक्षिण पाद (दाहिना पैर) गिरा था। देवी का नाम त्रिपुरसुंदरी है।
- चट्टल शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी का कपाल (खोपड़ी) गिरा था। देवी का नाम भवानी है।
- चंद्रनाथ शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी की भुजा (कंधे) गिरी थी। देवी का नाम भवानी है।
- सुगंधा शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी की नासिका (नाक) गिरी थी। देवी का नाम सुगंधा है।
- हिंगलाज शक्तिपीठ, पाकिस्तान: यहाँ देवी का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था। देवी का नाम हिंगलाज है।
- भैरवपर्वत शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी का ओष्ठ (ऊपरी होंठ) गिरा था। देवी का नाम अंबिका है।
- अट्टहास शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी का अधर (नीचे का होंठ) गिरा था। देवी का नाम फुल्लरा है।
- महालक्ष्मी शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी का ओष्ठ (ऊपरी होंठ) गिरा था। देवी का नाम कालिका है।
- अंबिका शक्तिपीठ, राजस्थान: यहाँ देवी के दाँत गिरे थे। देवी का नाम अंबिका है।
- कामाख्या शक्तिपीठ, असम: यहाँ देवी की योनि गिरी थी। देवी का नाम कामाख्या है।
- जला देवी शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की जीभ गिरी थी। देवी का नाम ज्वालामुखी है।
- माया देवी शक्तिपीठ, उत्तराखंड: यहाँ देवी का हृदय गिरा था। देवी का नाम माया है।
- जुगाड़्या शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की कलाई गिरी थी। देवी का नाम योगदा है।
- नैना देवी शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की नेत्र (आँखें) गिरी थीं। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
- गुहेश्वरी शक्तिपीठ, नेपाल: यहाँ देवी के घुटने गिरे थे। देवी का नाम महाशिरा है।
- कालीघाट शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी के अंगुष्ठ (दाहिने पैर का अंगूठा) गिरे थे। देवी का नाम कालिका है।
- किरीट शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी के कान गिरे थे। देवी का नाम विमला है।
- जसोरा शक्तिपीठ, बांग्लादेश: यहाँ देवी के अंगूठे (हाथ के) गिरे थे। देवी का नाम यशोदामती है।
- महिषमर्दिनी शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की दाहिनी जांघ गिरी थी। देवी का नाम चंडी है।
- जयंती शक्तिपीठ, मेघालय: यहाँ देवी की बाईं जंघा गिरी थी। देवी का नाम महाकाली है।
- कामाख्या शक्तिपीठ, असम: यहाँ देवी की योनि गिरी थी। देवी का नाम कामाख्या है।
- अमरनाथ शक्तिपीठ, जम्मू और कश्मीर: यहाँ देवी का कंठ (गला) गिरा था। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
- भैरवपर्वत शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी के होंठ गिरे थे। देवी का नाम अंबिका है।
- सोमनाथ शक्तिपीठ, गुजरात: यहाँ देवी का पेट गिरा था। देवी का नाम चामुंडा है।
- त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ, त्रिपुरा: यहाँ देवी का दाहिना पैर गिरा था। देवी का नाम त्रिपुरसुंदरी है।
- कंकाल शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी की कंधे की हड्डी गिरी थी। देवी का नाम कंकालेश्वरी है।
- नकुलेश्वरी शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी का बायाँ पैर गिरा था। देवी का नाम नकुलेश्वरी है।
- लंका शक्तिपीठ, श्रीलंका: यहाँ देवी का घुटना गिरा था। देवी का नाम इंद्रक्षी है।
- विरजा शक्तिपीठ, ओडिशा: यहाँ देवी की नाभि गिरी थी। देवी का नाम विमला है।
- ज्वालामुखी शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की जीभ गिरी थी। देवी का नाम ज्वालामुखी है।
- त्रिपुरभैरवी शक्तिपीठ, त्रिपुरा: यहाँ देवी का वस्त्र गिरा था। देवी का नाम त्रिपुरभैरवी है।
- सुंदर शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश: यहाँ देवी की दाईं भुजा गिरी थी। देवी का नाम सुंदरी है।
- अंबिका शक्तिपीठ, राजस्थान: यहाँ देवी की बाईं भुजा गिरी थी। देवी का नाम अंबिका है।
- कोल्हापुर शक्तिपीठ, महाराष्ट्र: यहाँ देवी की आँखें गिरी थीं। देवी का नाम महालक्ष्मी है।
- देवीकूप शक्तिपीठ, हरियाणा: यहाँ देवी के एड़ी गिरी थी। देवी का नाम सावित्री है।
- मनिकर्णिका शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: यहाँ देवी का कुंडल (कान का आभूषण) गिरा था। देवी का नाम विशालाक्षी है।
- शारदा शक्तिपीठ, पाकिस्तान: यहाँ देवी की दाईं हथेली गिरी थी। देवी का नाम शारदा है।
- अमरनाथ शक्तिपीठ, जम्मू और कश्मीर: यहाँ देवी का गर्दन गिरी थी। देवी का नाम महाकाली है।
- प्रयाग शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: यहाँ देवी के अंगुलियों (हाथ के) गिरे थे। देवी का नाम ललिता है।
- भैरवपर्वत शक्तिपीठ, मध्य प्रदेश: यहाँ देवी का ऊपरी होंठ गिरा था। देवी का नाम अंबिका है।
- मणिकर्णिका शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश: यहाँ देवी के दाँत गिरे थे। देवी का नाम विशालाक्षी है।
- दक्षिणेश्वर काली मंदिर, पश्चिम बंगाल: यहाँ देवी के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। देवी का नाम भवानी है।
शक्तिपीठों की पूजा का फल
इन शक्तिपीठों में दर्शन और पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। ऐसा माना जाता है कि इन स्थानों पर माँ दुर्गा की विशेष कृपा होती है और वे अपने भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं। इन मंदिरों में नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ रहती है।
