कंप्यूटर एक मशीन या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो आपसे इनपुट (निर्देश/डेटा) लेता है, उस इनपुट को प्रोसेस करता है, और फिर आपको आउटपुट (परिणाम) देता है। यह कई हिस्सों से मिलकर बनता है:
- इनपुट डिवाइस (Input Devices): जैसे कीबोर्ड, माउस, जिनसे आप डेटा देते हैं।
- प्रोसेसिंग यूनिट (Processing Unit): यही आपका प्रोसेसर (CPU) है, जो असली काम करता है।
- स्टोरेज डिवाइस (Storage Devices): जैसे RAM और हार्ड ड्राइव, जहाँ डेटा स्टोर होता है।
- आउटपुट डिवाइस (Output Devices): जैसे मॉनिटर, स्पीकर, प्रिंटर, जिनसे आपको परिणाम मिलता है।
प्रोसेसर जिसे CPU या Central Processing Unit भी कहते हैं) एक छोटी सी चिप होती है जो कंप्यूटर का दिमाग (Brain) कहलाती है।इसका मुख्य काम कंप्यूटर को दिए गए हर निर्देश को समझना, गणना करना और उसे पूरा करना है। जब आप माउस क्लिक करते हैं, कोई गेम खेलते हैं, या कोई टाइप करते हैं, तो यह सारा काम प्रोसेसर ही करता है।
प्रोसेसर के मुख्य कार्य:
- निर्देशों को लेना (Fetch): मेमोरी से निर्देश लेता है।
- समझना (Decode): यह समझता है कि कौन सा काम करना है।
- कार्य करना (Execute): यह अंकगणितीय, तार्किक या नियंत्रण (arithmetic, logical, and control) संबंधी गणनाएँ करके उस काम को पूरा करता है।
- परिणाम देना (Writeback): परिणाम को वापस मेमोरी में भेजता है।
इस पोस्ट को अंग्रेजी में देखें : Computer & Processor : AN Introduction
सबसे पहला कंप्यूटर” कौन सा था, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कंप्यूटर की किस परिभाषा का उपयोग कर रहे हैं—क्या यह यांत्रिक , प्रोग्रामेबल , या इलेक्ट्रॉनिक था।
- यांत्रिक (Mechanical) कंप्यूटर के जनक : चार्ल्स बैबेज इन्हें व्यापक रूप से “आधुनिक कंप्यूटर का जनक” (Father of the Computer) माना जाता है।
- डिफरेंस इंजन (Difference Engine):
- समय और योगदान : 1820 का दशक।यह एक स्वचालित, यांत्रिक कैलकुलेटर था जिसे सटीक गणितीय सारणी (mathematical tables) बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। यह भाप से चलने वाला था और त्रुटियों को कम करने के लिए बनाया गया था।
- एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine): 1830 का दशक और यह उनका सबसे महत्वपूर्ण आविष्कार था। यह पहला ऐसा डिज़ाइन था जिसमें आज के कंप्यूटर के सभी मूलभूत हिस्से थे:
- मिल (Mill): जो आज के CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) की तरह गणना करता था और जो मेमोरी की तरह डेटा रखता था।
- इनपुट/आउटपुट: पंच कार्ड्स (Punch Cards) के माध्यम से।
- इसे पहला जनरल-पर्पस (सामान्य उद्देश्य वाला) कंप्यूटर डिज़ाइन माना जाता है, हालांकि इसे बैबेज अपने जीवनकाल में पूरी तरह से बना नहीं पाए थे।
एडा लवलेस (Ada Lovelace) इन्होंने बैबेज के एनालिटिकल इंजन के लिए नोट्स लिखे थे और एक एल्गोरिथम (Algorithm) बनाया था। इसी कारण उन्हें दुनिया की पहली कंप्यूटर प्रोग्रामर (First Computer Programmer) के रूप में पहचान मिली।
- पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर :ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer)
आधुनिक कंप्यूटिंग युग की शुरुआत इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों से हुई, और इस श्रेणी में ENIAC सबसे महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण 1943 में शुरू हुआ और 1945 में बनकर तैयार हुआ (1946 में सार्वजनिक रूप से घोषित)।यह पहला पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक, प्रोग्रामेबल डिजिटल कंप्यूटर था।इसने गणना के लिए वैक्यूम ट्यूब्स (Vacuum Tubes) का इस्तेमाल किया (लगभग 18,000)।यह 50 फीट लंबा, 30 टन वजनी था और एक बड़े कमरे जितना स्थान घेरता था।इसका उपयोग अमेरिकी सेना के लिए आर्टिलरी फायरिंग टेबल की गणना करने के लिए किया गया था।
प्रोग्राम स्टोरेज की अवधारणा : EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer): ENIAC के बाद, मौचली और एकर्ट ने जॉन वॉन न्यूमैन के साथ मिलकर EDVAC पर काम किया।योगदान: EDVAC ने “स्टोर्ड-प्रोग्राम आर्किटेक्चर” (Stored-Program Architecture) की अवधारणा पेश की, जिसका अर्थ है कि कंप्यूटर प्रोग्राम और डेटा दोनों को एक ही मेमोरी में स्टोर कर सकता है। यह सिद्धांत आज भी हर आधुनिक कंप्यूटर (आपके लैपटॉप या फ़ोन) की नींव है।
- अगर आप ‘जनक’ की बात करें: तो वह चार्ल्स बैबेज हैं।
- अगर आप ‘पहला प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर’ की बात करें: तो वह ENIAC था।
कंप्यूटर की पीढ़ियाँ ( Generations of Computers)
अब तक कंप्यूटर के विकास को मुख्य रूप से पाँच पीढ़ियों (Five Generations) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक पीढ़ी एक बड़ी तकनीकी छलांग को दर्शाती है जिसने कंप्यूटर के आकार, गति और क्षमता को पूरी तरह से बदल दिया।
- पहली पीढ़ी (First Generation: 1940s – 1950s)
- मुख्य तकनीक: वैक्यूम ट्यूब्स (Vacuum Tubes)
- विशेषताएँ: विशेषताएँ कुछ इस प्रकार हैं
- ये कंप्यूटर बहुत बड़े होते थे (पूरा कमरा घेर लेते थे)।
- इनकी गति बहुत धीमी थी और ये बहुत ज़्यादा गर्मी (Heat) पैदा करते थे।
- इनका उपयोग मुख्य रूप से वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग गणनाओं के लिए होता था।
- उदाहरण: ENIAC, EDVAC, UNIVAC।
- दूसरी पीढ़ी (Second Generation: 1950s – 1960s)
- मुख्य तकनीक: ट्रांजिस्टर (Transistors)
- विशेषताएँ: विशेषताएँ कुछ इस प्रकार हैं
- ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब्स की तुलना में छोटे, तेज़, सस्ते और कम गर्मी पैदा करने वाले थे।
- कंप्यूटर का आकार छोटा हुआ और प्रोसेसिंग गति बढ़ी।
- असेंबली भाषा (Assembly Language) और शुरुआती उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाएँ (High-Level Languages) जैसे FORTRAN और COBOL का उपयोग शुरू हुआ।
- उदाहरण: IBM 7000 सीरीज, CDC 1604।
- तीसरी पीढ़ी (Third Generation: 1960s – 1970s)
- मुख्य तकनीक: एकीकृत सर्किट (Integrated Circuits – ICs) या चिप्स
- विशेषताएँ: विशेषताएँ कुछ इस प्रकार हैं
- एक IC में कई ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर और कैपेसिटर को एक छोटे से सिलिकॉन चिप पर पैक किया गया। इससे गति बहुत तेज़ हुई और लागत कम हुई।
- कंप्यूटर का आकार और छोटा हो गया (जैसे डेस्कटॉप या मिनी-कंप्यूटर)।
- ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) का उपयोग शुरू हुआ, जिससे एक ही समय में कई प्रोग्राम चलाए जा सकते थे।
- उदाहरण: IBM 360 सीरीज, DEC PDP-8।
- चौथी पीढ़ी (Fourth Generation: 1970s – 2010s)
- मुख्य तकनीक: वृहद स्तरीय एकीकरण (Very Large Scale Integration – VLSI) या माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor)
- विशेषताएँ:
- हजारों ICs को एक ही चिप पर फिट किया गया, जिससे माइक्रोप्रोसेसर चिप (Microprocessor Chip) का विकास हुआ। यह कंप्यूटर के पूरे सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) को एक चिप पर ले आया।
- इससे पर्सनल कंप्यूटर (PC) क्रांति आई।
- इंटरनेट, ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI), और कंप्यूटर नेटवर्किंग का विकास हुआ।
- उदाहरण: IBM PC, Apple Macintosh, Intel Pentium चिप्स वाले कंप्यूटर।
- पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation: 2010s – वर्तमान)
- मुख्य तकनीक: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI), समांतर प्रोसेसिंग (Parallel Processing), और ULSI (Ultra Large Scale Integration)
- विशेषताएँ: विशेषताएँ कुछ इस प्रकार हैं
- इस पीढ़ी का मुख्य लक्ष्य ऐसी कंप्यूटिंग प्रणालियाँ विकसित करना है जो मानव मस्तिष्क की तरह प्रतिक्रिया दे सकें, जैसे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और डीप लर्निंग।
- कंप्यूटर का प्रदर्शन बढ़ाने के लिए पैरेलल प्रोसेसिंग और सुपरकंडक्टर तकनीक का उपयोग।
- वॉयस रिकग्निशन, प्राकृतिक भाषा को समझना, और क्वांटम कंप्यूटिंग पर शोध।
- उदाहरण: रोबोटिक्स, न्यूरल नेटवर्क्स, स्मार्टफोन्स, और आज के AI-संचालित सिस्टम।
इस प्रकार, कंप्यूटर ने वैक्यूम ट्यूबों से लेकर आज के शक्तिशाली AI-आधारित सिस्टम तक, पाँच प्रमुख तकनीकी परिवर्तनों को पार किया है।
CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) की पीढ़ियाँ ( Generations of CPU)
कंप्यूटर की तरह, CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) के विकास को भी पीढ़ियों (Generations) में बाँटा जाता है, लेकिन यह विभाजन CPU बनाने वाली कंपनियों, जैसे Intel या AMD, के आर्किटेक्चर (Architecture) और डिज़ाइन में आए बड़े बदलावों पर आधारित होता है।व्यापक रूप से देखा जाए, तो CPU के विकास को मुख्य रूप से 1970 के दशक में पहले माइक्रोप्रोसेसर के आने के बाद से गिना जाता है, जो चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर की नींव बना।यहाँ प्रमुख तकनीकी बदलावों के आधार पर CPU की पीढ़ियों का विभाजन दिया गया है:
माइक्रोप्रोसेसर CPU की प्रमुख पीढ़ियाँ
CPU की पीढ़ियों को आमतौर पर निम्नलिखित तकनीक के आधार पर गिना जाता है:
- पहली माइक्रोप्रोसेसर पीढ़ी (1970s): 4-बिट और 8-बिट CPU
- मुख्य बदलाव: पूरे CPU को एक ही चिप (माइक्रोप्रोसेसर) पर लाना।
- विशेषताएँ: 4-बिट से 8-बिट डेटा प्रोसेसिंग। बहुत कम ट्रांजिस्टर।
- उदाहरण: Intel 4004 (1971 में पहला कमर्शियल माइक्रोप्रोसेसर), Intel 8080।
- दूसरी पीढ़ी (1970s – 1980s): 16-बिट CPU
- मुख्य बदलाव: 16-बिट प्रोसेसिंग, जिससे डेटा हैंडलिंग क्षमता बढ़ी।
- विशेषताएँ: पर्सनल कंप्यूटर (PC) के विकास में सहायक।
- उदाहरण: Intel 8086, Motorola 68000।
- तीसरी पीढ़ी (1980s – 1990s): 32-बिट CPU (The x86 Era Begins)
- मुख्य बदलाव: 32-बिट आर्किटेक्चर (IA-32), जिसने आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows और Mac OS) को संभव बनाया।
- विशेषताएँ: कैश मेमोरी का परिचय, बेहतर स्पीड।
- उदाहरण: Intel 80386, Intel 80486, और शुरुआती Pentium प्रोसेसर।
- चौथी पीढ़ी (1990s – 2000s): पाइपलाइनिंग और हाई-स्पीड क्लॉक
- मुख्य बदलाव: जटिल इंस्ट्रक्शन पाइपलाइनिंग और उच्च क्लॉक स्पीड (GHz में मापी गई)।
- विशेषताएँ: मल्टीमीडिया और 3D ग्राफिक्स को संभालने की बेहतर क्षमता।
- उदाहरण: Intel Pentium II / III / 4 (NetBurst आर्किटेक्चर)।
- पाँचवी पीढ़ी (2000s – 2010s): मल्टी-कोर क्रांति (Multi-Core Revolution)
- मुख्य बदलाव: क्लॉक स्पीड बढ़ाने के बजाय, एक ही चिप पर एक से अधिक प्रोसेसिंग कोर (Dual-Core, Quad-Core) डालना।
- विशेषताएँ: 64-बिट आर्किटेक्चर (x86-64) का मानक बनना। बिजली की खपत कम करने पर ध्यान।
- उदाहरण: Intel Core 2 Duo, शुरुआती Intel Core i-सीरीज (i3, i5, i7), AMD Athlon 64।
- छठी पीढ़ी (2010s – वर्तमान): इंटीग्रेटेड ग्राफिक्स और ऑप्टिमाइजेशन
- मुख्य बदलाव: CPU और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) को एक ही चिप पर इंटीग्रेट करना (APU)।
- विशेषताएँ: प्रति वाट (per watt) बेहतर परफॉर्मेंस, लैपटॉप के लिए कुशल डिज़ाइन। इंटेल कोर आई-सीरीज (Intel Core i-Series) में लगातार आर्किटेक्चरल सुधार (जैसे Skylake, Kaby Lake, आदि) और AMD Ryzen का उदय।
- उदाहरण: वर्तमान के सभी Intel Core i9/i7/i5/i3 और AMD Ryzen प्रोसेसर।
CPU की पीढ़ी को गिनने का कोई निश्चित अंतर्राष्ट्रीय नियम नहीं है। यह तकनीकी इनोवेशन पर निर्भर करता है। हालाँकि, पहले माइक्रोप्रोसेसर (1970s) से लेकर आज के मल्टी-कोर, 64-बिट, AI-केंद्रित चिप्स तक, CPU लगभग छह बड़ी पीढ़ियों के तकनीकी बदलावों से गुज़र चुका है।
हम अगले पोस्ट में विभिन्न प्रकार के प्रोसेसर के बारे में जानेंगे।
